धान की फसल पर तना छेदक और पत्ती मोड़क का खतरा, कृषि विभाग ने किसानों को किया अलर्ट

रायपुर। धान की फसल में तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
विभाग ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही नियंत्रण के उपाय अपनाने को कहा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक खेत में जरूरत से ज्यादा उर्वरक का इस्तेमाल और लंबे समय तक पानी भरा रहने से इन कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है।
तना छेदक से पीली पड़ने लगती हैं पत्तियां
तना छेदक धान की फसल के लिए नुकसानदायक प्रमुख कीटों में शामिल है। इसके शुरुआती प्रकोप में पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। तने के निचले हिस्से में छोटे छेद दिखाई देते हैं और अंदर से तना खोखला होने लगता है। प्रकोप बढ़ने पर धान की बालियां सफेद होकर सूख सकती हैं। इससे दाना बनने की प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ उत्पादन में कमी आ सकती है।
कृषि विभाग ने इसके नियंत्रण के लिए क्लोरोसाइपर (क्लोरपाइरीफास 50% + साइपरमेथ्रिन 5%) का 50 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।
पत्ती मोड़क में पत्तियों पर दिखती हैं सफेद धारियां
पत्ती मोड़क कीट को ग्रामीण क्षेत्रों में ‘सांवा कीट’ भी कहा जाता है। इसकी हरी इल्ली धान की पत्तियों को मोड़कर अंदर छिप जाती है और हरे हिस्से को खाती है। इससे पत्तियों पर सफेद और पारदर्शी धारियां दिखाई देने लगती हैं। पत्तियों का हरापन कम होने से पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है।
इसके नियंत्रण के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी 6 से 10 मिलीलीटर या एमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 8 से 10 ग्राम प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव की सलाह दी गई है।
जलभराव और ज्यादा खाद से बचें
कृषि विभाग ने किसानों से संतुलित मात्रा में उर्वरक इस्तेमाल करने और खेत में लंबे समय तक जलभराव नहीं होने देने की अपील की है। किसानों को पत्तियों के पीले पड़ने, तने में छेद, सफेद बालियां या पत्तियों पर सफेद धारियां दिखने पर तुरंत खेत का निरीक्षण करना चाहिए। समय पर पहचान और नियंत्रण से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।



