जांजगीर-चांपा

Raigarh: इनके जज्बे को सलाम!कोई 2 महीने से नहीं गया घर….तो किसी ने 3 साल की बेटी से को दूर रखकर जंग में निभा रही अहम भूमिका

रायगढ़।  (Raigarh) कोरोना काल में कोरोना को मात देने के लिए कोरोना योद्धा दिन रात मेहनत कर रहे हैं ना कोई छुट्टी ना कोई त्यौहार अपनों से दूर होकर पीपीई किट पहनकर खुद की जिंदगी दांव में लगा कर दूसरों को जीवनदान दे रहे हैं ये कोरोना योद्धा. आज हम लखीराम अग्रवाल मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के वायरोलॉजी विभाग के कोरोना योद्धाओं से आपको रूबरू कराएंगे. जहां की टीम 24 x7 घंटे काम करके एक नया कीर्तिमान रच दिया है इनके द्वारा 3लाख 70 हजार से भी अधिक आरटी पीसीआर जांच कर कोरोना  काल की इस जंग में अपनी एक अहम भूमिका निभाई .

3साल की बेटी को खुद से रखती है दूर 

माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख एवं वायरोलॉजी लैब की इंचार्ज डॉ अनुभा पटेल ने बताया कि 3लाख 70 हजार से भी अधिक आरटी पीसीआर की जांच हमारे स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दिन रात मेहनत करके किए हैं. उनका कहना है कि इस वैश्विक महामारी में वायरोलॉजी विभाग के स्वास्थ्य कर्मियों की अहम भूमिका रही साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चुनौती बड़ी थी लेकिन हमारे डीन सर एवं उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन में व वायरोलॉजी डिपार्टमेंट की टीम जिसमें डॉक्टर माइक्रोबायोलॉजिस्ट लैब टेक्नीशियन के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भी अहम भूमिका रही उनकी कड़ी मेहनत की वजह से ही यह उपलब्धि हमें मिली सतत जांच के फल स्वरुप ही अब कोरोना संक्रमित मरीजों की दरों में भी कमी आई है. साथ ही साथ उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें भी गर्व महसूस हो रहा है कि उन्होंने समाज के लिए देश के लिए इस जंग में अपनी भूमिका भी निभाई. वे बताती हैं कि उनकी  बेटी 3 साल की है लेकिन इस परिस्थिति में वह उनके साथ नहीं रह पाती बच्चे को घर पर ही छोड़ कर ड्यूटी करना पड़ रहा है. जो मां के लिए सबसे बड़ी चुनौती हो जाती है लेकिन उनका कहना है कि यह परिस्थिति लोगों की जान बचाने की है . साथ ही साथ उन्होंने लोगों से यह भी अपील की कि वह सरकार द्वारा निर्धारित कोरोनावायरस का पालन करें खुद को सुरक्षित रखें और दूसरों को भी सुरक्षित रखें.

यहां होती है 24 घंटे टेस्टिंग 

आपको बता दें कि रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में स्थित वायरोलॉजी लैब में प्रतिदिन हजारों की संख्या में जांच होती है वही यहां के स्टाफ अलग-अलग 3 पाली में यहां 24 घंटे काम करते हैं. चाहे दिन हो या रात यहां के स्वास्थ्य कर्मी काम करते ही रहते हैं.

परिजन थे कोरोना संक्रमित फिर भी ना पहुंच सकी ये योद्धा

डॉक्टर अनुनीति बताती है कि उनके परिजन कोरोना संक्रमित थे लेकिन वायरोलॉजी लैब में उनकी जिम्मेदारी इतनी ज्यादा थी कि वह अपने परिजनों से मिलने तक भी नहीं पहुंच पाई पिछले 2 माह से ना तो वह घर गई हैं ना ही अपने परिजनों से मिली है कोरोना की दूसरी लहर में जिम्मेदारी बड़ी हो गई थी इसीलिए पहले उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को चुनी और निरंतर लैब में मरीजों की जांच की जिम्मेदारी उठाई और परिजनों से लगातार फोन एवं वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ी रही. हालांकि वर्तमान में उनके परिजन सभी का स्वास्थ्य ठीक है. वे कहती हैं कि इस समय के दौर में हर किसी को निस्वार्थ भाव से सेवा करनी चाहिए और उन्हें गर्व है कि उन्होंने मेडिकल प्रोफेशन को चुना था जो आज देश और समाज की काम आ रही है.

ना त्यौहार ना अवकाश ड्यूटी इन कोरोना योद्धाओं का जीवन

वायरोलॉजी में पदस्थ चिकित्सक डॉ हेमंत जायसवाल बताते हैं कि वे पिछले 4 माह से अपने घर नहीं गए उनका कहना है दूसरी लहर में जिम्मेदारी और बढ़ गई मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी और उस दौरान स्टाफ की कमी थी ऐसी स्थिति में जब वह घर चले जाते तो उनके अन्य साथियों पर कार्य का भार बढ़ जाता इसीलिए वह अपने निर्धारित समय से भी अधिक समय तक काम किये . ताकि मरीजों को जल्द से जल्द रिपोर्ट मिल उनका तुरंत उपचार हो सके. उनका कहना है कि उन्हें खुद के ऊपर गर्व है कि उन्होंने विपदा की इस घड़ी में समाज एवं देश के लिए कुछ किया. हालांकि परिवार से मैं हर शाम को वीडियो कॉल के माध्यम से बात कर लेता हूं. मुझे गर्व है कि मैंने मेडिकल प्रोफेशन को चुना था और आज मैं इस विषम परिस्थिति में देश और समाज को मानव सेवा हेतु अपनी सेवा दे रहा हूं.

कोरोना  की दूसरी लहर में साइंटिस्ट की हुई थी मौत

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के वायरोलॉजी डिपार्टमेंट में पदस्थ साइंटिस्ट डॉक्टर एस के पैंकरा जिसकी कोरोना से मौत हो गई आपको बता दें कि इनके द्वारा बीते 1 साल से कोरोना मरीजों की जांच करने की जिम्मेदारी थी और उनके दूसरी लहर में वे कोरोना संक्रमित हो गए लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान दांव में लगाने वाले साइंटिस्ट डॉक्टर एस के पैंकरा जिनके इलाज मेडिकल कॉलेज में चला लेकिन लाख प्रयासों के बावजूद उन्हें नहीं बचा पाए.

कई संक्रमित हुए  लेकिन डटे रहे

आपको बता दें कि वायरोलॉजी लैब में पदस्थ कई चिकित्सक एवं चिकित्सा कर्मी कोरोना संक्रमित हुए लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और लगातार जांच की संख्या भी बढ़ा दी गई जिसके फलस्वरूप आज कोरोना संक्रमण का दर भी घट रहा है. कहीं ना कहीं इनकी मेहनत रंग लाती नजर आ रही है.

3लाख 70 हजार से भी अधिक आरटी पीसीआर जांच करना एक कठिन चुनौती से कम नहीं था लेकिन इस कठिन चुनौती को वायरोलॉजी विभाग की डॉ अनुभा पटेल के कुशल नेतृत्व में डॉ अनुनीति ,कुमारी अंकिता ,डॉ स्वाति कुजूर, डॉ हेमंत जायसवाल ,डॉ.योगिता ,प्रशांत ,डॉ ए के सिंह, डॉ एनसी बंजारा डॉ श्रीकांत के साथ-साथ वायरोलॉजी डिपार्टमेंट में पदस्थ समस्त चिकित्सा कर्मी एवं वहां के समस्त स्टाफ  की महत्वपूर्ण भूमिका रही जिनकी बदौलत यह कीर्तिमान रचा गया.

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