धमतरी

Dhamtari: दारू के धंधे में देर भी अंधेर भी..और सोता प्रशासन

संदेश गुप्ता@धमतरी। (Dhamtari) जिले में सरकार की शराब बेचो योजना आजकल नियंत्रण से बाहर है, होम डिलीवरी के पूरे सिस्टम पर दारू दस्यु दल का कब्जा हो चुका है, ऑनलाइन पोर्टल के खुलते ही दारू के डकैत शुरुआती एक दो घण्टे में ही अपने आदमियों से पूरा कोटा बुक करवा देते हैं, बड़े पैमाने पर शराब को उठाने बाकायदा चार पहिया रथ शराब दुकानों के बाहर लगती है और यही शराब फिर बाजार में ऊंचे दाम पर ब्लेक में बिकती है, कोई शक नही है कि इस संगठित काम मे दुकानों के कर्मचारी भी सांठगांठ का हिस्सा होंगे, इसका सबसे पुख्ता प्रमाण बीते शनिवार को मिला जब सरकारी गाड़ी में सरकारी ड्राइवर डिलीवरी बॉय के साथ, होम डिलीवरी करते हुए कैमरे में कैद हो गया था, अब तो व्यवस्था बनाने वाले, बेचने वाले, ब्लेक करने वाले सभी मौसेरे भाई की तरह काम कर रहे है, बेचारा पीने वाला अभी भी उतनी ही कीमत दे रहा है जितनी वो होम डिलीवरी शुरू होने से पहले दे रहा था। कायदे से सरकारी वाहन में शराब की होम डिलीवरी करवाने वाले पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए, अगर शराब दुकान सरकार चला रही है तो लोगो को सीधे शराब मिलनी चाहिए, इस बीच कोई गड़बड़ी करता है तो उसे रोका जाना चाहिए, लेकिन ये हो नही रहा है, तो इसे चौपट व्यवस्था न कहे तो और क्या कहे??

सवाल ये है कि राजा की शक्तियां जिन्हें मिली है वो क्या कर रहे हैं, इस मामले में जब खबर 36  ने पीएससी परीक्षा पास होकर राज्य प्रशासनिक सेवा में आये और फिलहाल धमतरी के दारू प्रमुख यानी जिला आबकारी अधिकारी राजेश जायसवाल से सवाल पूछने के लिए फोन लगाया उन्होंने फोन ही नही उठाया, कार्यालय में भी नही मिले, लगभग 5 दिनों तक रोजाना फोन किया जाता रहा, शायद उन्होंने फोन नही उठाने की अपनी प्रतिज्ञा नही तोड़ी।

इसके बाद खबर 36 ने अंतिम विकल्प अपनाया भारत की सबसे महत्वपूर्ण और कठिन यूपीएससी परीक्षा पास कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में आये और फिलहाल धमतरी कलेक्टर जय प्रकाश मौर्य को फोन लगाया उन्होंने भी फोन नही उठाया, उनके कार्यालय के कर्मचारी ने बताया कि अभी साहब ऑफिस आ ही नही रहे हैं।

उधर शराब की होम डिलीवरी नाम मात्र की ही है, काम तो काला पीला ही चल रहा है, बेखौफ, बेरोकटोक, शक्तिशाली लोग या तो कुछ कर नही पा रहे है या कुछ करना ही नही चाह रहे हैं..ये तो साफ है कि जिन्हें आबकारी का जिम्मा मिला है वो अपनी ज़िम्मेदारी 100 फिसिदी नही निभा रहे है..इस परीक्षा में वो पास नही कहे जा सकते..और जिन्हें आबकारी के जिम्मेदार से काम करवाने का जिम्मा मिला है वो भी अपनी जिम्मेदारी नही निभा रहे तो उन्हें भी इस परीक्षा में पास कैसे कहे…

आखिर में एक सवाल…

ये जो हमारे देश मे बड़ी बड़ी परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं, क्या इनका वो नतीजा निकलता भी है, जिसके लिए इन्हें आयोजित किया जाता है..??

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