दिल्ली। 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए लेबर कोड का असर अब प्राइवेट नौकरी करने वाले कर्मचारियों की सैलरी पर दिखने लगा है। सरकार के नए नियम के तहत अब बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर कुल सैलरी का कम से कम 50% होना जरूरी कर दिया गया है। इससे कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में कमी आ सकती है।
पहले कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी में बेसिक हिस्सा कम रखकर ज्यादा अलाउंस देती थीं, जिससे PF जैसी कटौतियां कम होती थीं। लेकिन नए नियम के बाद बेसिक सैलरी बढ़ेगी, जिससे PF (प्रॉविडेंट फंड) में योगदान भी बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर यह होगा कि हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी घट जाएगी।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की कुल सैलरी 50,000 रुपये है, तो पहले 20,000 रुपये बेसिक और 30,000 रुपये अलाउंस होता था। इस पर 12% PF कटौती यानी 2,400 रुपये होती थी और इन-हैंड सैलरी 47,600 रुपये मिलती थी। अब नए नियम के तहत बेसिक 25,000 रुपये हो जाएगा और PF कटौती 3,000 रुपये होगी। ऐसे में इन-हैंड सैलरी घटकर 47,000 रुपये रह जाएगी, यानी हर महीने 600 रुपये कम मिलेंगे।
हालांकि, यह बदलाव सभी कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा। जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये या उससे कम है, उनकी सैलरी पर इसका असर नहीं पड़ेगा। लेकिन जिनकी सैलरी इससे अधिक है, उन्हें इस बदलाव का प्रभाव झेलना पड़ेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही इन-हैंड सैलरी कम हो रही है, लेकिन लंबे समय में यह कर्मचारियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। PF और ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी होने से रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा और भविष्य में आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
