दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (SIR) की निगरानी करने वाले वरिष्ठ IAS अधिकारी मनोज अग्रवाल को नई सरकार में मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है।
सुवेंदु सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस और टीएमसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने इसे चुनाव आयोग और BJP के बीच मिलीभगत का सबूत बताया है।
1990 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के अधिकारी मनोज अग्रवाल की देखरेख में विधानसभा चुनावों से पहले SIR प्रक्रिया कराई गई थी।
इस दौरान करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। इसके अलावा रिटायर्ड IAS अधिकारी सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया गया है। वे भी SIR प्रक्रिया के दौरान ऑब्जर्वर थे।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ये नियुक्तियां चुनाव आयोग और BJP के बीच खुली सांठगांठ को दिखाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने निष्पक्ष संस्था की तरह काम नहीं किया और BJP को फायदा पहुंचाने के लिए 27 लाख लोगों को वोट देने से रोका गया।
वहीं TMC नेता साकेत गोखले ने इसे “बेहद बेशर्मी भरा कदम” बताया। TMC सांसद सागरिका घोष ने सवाल उठाया कि क्या अब भी कोई यह मान सकता है कि बंगाल चुनाव निष्पक्ष थे। मनोज अग्रवाल IIT कानपुर के पूर्व छात्र हैं और जुलाई में रिटायर होने वाले हैं।
वे मौजूदा मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला की जगह लेंगे। दूसरी ओर, सुब्रत गुप्ता को 9 मई को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया था। चुनाव के दौरान TMC ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई थीं।
