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बुजुर्गों की सेहत पर भारी पड़ रही लापरवाही, फ्लू से हर साल 1.2 लाख मौतें; टीकाकरण बेहद कम

दिल्ली। भारत में बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ‘जर्नल ऑफ द इंडियन एकेडमी ऑफ गेरियाट्रिक्स’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, देश में हर साल इन्फ्लूएंजा (फ्लू) के कारण लगभग 1.2 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से करीब दो-तिहाई मृतक 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के होते हैं। इसके बावजूद फ्लू से बचाव के लिए टीका लगवाने वाले बुजुर्गों की संख्या 2 प्रतिशत से भी कम है।

अध्ययन में ‘लोंगीट्यूडल एजिंग स्टडी इन इंडिया’ के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि भारत में बुजुर्गों का टीकाकरण बेहद कम स्तर पर है। रिपोर्ट के अनुसार, टिटनेस-डिप्थीरिया का टीका केवल 2.75 प्रतिशत बुजुर्गों ने लगवाया है, जबकि हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन सिर्फ 1.82 प्रतिशत लोगों तक पहुंच पाई है। वहीं फ्लू वैक्सीन लेने वालों की संख्या मात्र 1.59 प्रतिशत है। सबसे चिंताजनक स्थिति निमोनिया से बचाव के लिए लगने वाले न्यूमोकोकल टीके की है, जिसे केवल 0.74 प्रतिशत बुजुर्गों ने ही लिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों के अस्पताल में भर्ती होने की सबसे बड़ी वजह संक्रमण है, जिसमें निमोनिया प्रमुख कारणों में शामिल है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी और टीकों को लेकर हिचकिचाहट के कारण अधिकांश लोग समय पर टीकाकरण नहीं करा रहे हैं।

डॉक्टरों के अनुसार भारत में वयस्क और बुजुर्ग टीकाकरण को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। इसके पीछे राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट टीकाकरण नीति का अभाव, वैक्सीन की कीमत, आसान उपलब्धता की कमी और जागरूकता का अभाव प्रमुख कारण हैं।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को मिलकर बुजुर्गों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि फ्लू, निमोनिया और अन्य संक्रमणों से होने वाली मौतों को कम किया जा सके।

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