रायपुर

Naveen Jindal ने कहा- संपन्नता के लिए उद्योग व इंजीनियरिंग कॉलेजों में समन्वय जरूरी

रायपुर। (Naveen Jindal) कुरुक्षेत्र के पूर्व सांसद और जिन्दल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) के चेयरमैन नवीन जिन्दल ने कहा कि राष्ट्र की संपन्नता और तेजी से विकास के लिए उद्योग एवं आईआईटी व अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों के बीच परस्पर सहयोग-समन्वय आवश्यक है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि कॉलेजों को ये पता चल सकेगा कि उद्योग को क्या चाहिए और उसी के अनुरूप कॉलेज मानव संसाधन तैयार कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा में जेएसपीएल इंजीनियरिंग कॉलेजों से समन्वय कर रहा है जिसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं।

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रोजगार और व्यापार की दृष्टि से एमएसएमई महत्वपूर्ण

नवीन जिन्दल(Naveen Jindal)  एमएसएमई प्रोत्साहन के लिए आईआईटी-मद्रास ई-सेल की पहल “पंख” के संदर्भ में आयोजित वेबीनार में कुटीर,लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर अपने विचार प्रकट कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रोजगार और व्यापार की दृष्टि से एमएसएमई की देश में महत्वपूर्ण भूमिका है। एमएसएमई घर, गांव से भी संचालित हैं, जो देश के कमजोर वर्गों की रीढ़ की हड्डी हैं। लगभग 11 करोड़ लोगों की आजाविका का माध्यम एमएसएमई ही हैं, जिनके समक्ष चुनौतियां भी हैं और उनकी अपनी अनेक खूबियां भी,जिनका गहरा सामाजिक-आर्थिक सरोकार है।

एमएसएमई का बड़े उद्योगों से गहरा नाता

जेएसपीएल के चेयरमैन जिन्दल(Naveen Jindal)  ने कहा कि एमएसएमई का बड़े उद्योगों से गहरा नाता है। वे अपना उपभोक्ता सामान तैयार करने के लिए कई तरह के कच्चे माल बड़े उद्योगों से लेते हैं। आज कोविड-19 संकट के समय उनके सामने धन का संकट है तो बैंकों से वाजिब दर पर वित्तीय सहयोग में उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए और उनके समर्थन में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। यदि वे औपचारिक वित्तीय संस्थाओं से जुड़ते हैं तो उनकी धन की समस्या दूर हो सकती है और वे अपना कारोबार आगे बढ़ा सकते हैं। 

इंडस्ट्री 4.0 पर उन्होंने कहा कि आज का युवा तकनीकी रूप से सिद्धहस्त, सक्षम और सबल है। उसकी जानकारी दुरुस्त है और वे राष्ट्र निर्माण में प्रभावशाली भूमिका निभा सकते हैं।

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एमएसएमई के विकास के लिए कृतसंकल्प

इस अवसर पर केंद्रीय एमएसएमई विभाग के सचिव सुधीर गर्ग ने कहा कि सरकार एमएसएमई के विकास के लिए कृतसंकल्प है। सरकार ने इन उद्योगों के लिए आवश्यक तकनीकी उपकरणों के उत्पादन के लिए 9000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है ताकि वे अपनी उत्पादकता बढ़ाकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सार्थक योगदान कर सकें।

आईआईटी-मद्रास ई-सेल की पहल “पंख”

इस अवसर पर एमएसएमई प्रोत्साहन के लिए आईआईटी-मद्रास ई-सेल की पहल “पंख” को करिल गर्ग एवं ई-सेल की हेड हनुषावर्धिनी एस. ने लांच किया। इस अभियान के तहत आने वाले महीनों में अनेक कार्यक्रम किये जाएंगे जिससे एमएसएमई की अहमियत को तवज्जो मिले। इस परिचर्चा का संचालन मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार साहू ने किया।

आईआईटी मद्रास की ई-सेल सफल छात्रों द्वारा संचालित संगठन है जो देश के युवाओं को उद्यमिता के प्रेरित करती है।

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