नैनो उर्वरक से बढ़ी धान की पैदावार, लागत हुई कम: किसान निरंजन सिदार का अनुभव बना मिसाल

रायपुर। कृषि में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों को बेहतर उत्पादन और कम लागत का लाभ मिल रहा है।

महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के ग्राम दूधीपाली के प्रगतिशील किसान निरंजन सिदार ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग कर धान उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनका अनुभव अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

किसान निरंजन सिदार ने बताया कि उन्होंने पिछले खरीफ सीजन में धान की खेती के दौरान नैनो डीएपी से बीज उपचार कर फसल की शुरुआत की थी। इसके बाद फसल की वृद्धि अवस्था में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का छिड़काव किया गया।

आधुनिक उर्वरक तकनीक अपनाने से फसल में रोग और कीटों का प्रकोप कम रहा, जिससे पौधे स्वस्थ और मजबूत बने रहे। इसके साथ ही धान की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि दर्ज की गई।

उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग का सबसे बड़ा फायदा खेती की लागत में कमी के रूप में सामने आया।

नैनो डीएपी और नैनो यूरिया को कीटनाशकों के साथ मिलाकर एक ही बार में छिड़काव किया जा सकता है, जिससे मजदूरी और समय दोनों की बचत होती है। इससे खेती अधिक लाभकारी और सुविधाजनक बन गई है।

कृषि विभाग भी किसानों को नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग के लिए लगातार जागरूक कर रहा है।

विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार नैनो डीएपी का उपयोग बीज उपचार, पौध उपचार और प्रारंभिक वृद्धि अवस्था में किया जाता है, जबकि नैनो यूरिया फसल की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अनुशंसित मात्रा और सही विधि से नैनो उर्वरकों का उपयोग करने पर उत्पादन बढ़ता है, गुणवत्ता में सुधार आता है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।

यही कारण है कि प्रदेश में अब अधिक से अधिक किसान नैनो उर्वरकों को अपनाने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। किसान निरंजन सिदार की सफलता इस दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण मानी जा रही है।

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