मणिपुर में नगा-कुकी संघर्ष तेज, 5 महीने में 25 मौतें: असम राइफल्स पर हमला, दो शहीद जवानों को राजकीय सम्मान

दिल्ली। मणिपुर में मई 2023 से जारी मैतेई-कुकी जातीय हिंसा के बीच अब नगा और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष ने नया रूप ले लिया है। राज्य के उखरुल और कामजोंग जिले इस टकराव का केंद्र बन गए हैं।
फरवरी 2026 से शुरू हुए इस नए संघर्ष में अब तक 25 लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में असम राइफल्स के काफिले पर हुए हमले को भी इसी तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
सोमवार को उखरुल जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास असम राइफल्स के काफिले पर उग्रवादियों ने हमला कर दिया था।
इस हमले में उत्तराखंड के दो जवान शहीद हो गए। गुरुवार को इंफाल एयरपोर्ट पर राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने दोनों शहीदों को राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांव भेजे गए।
नगा संगठनों का आरोप है कि असम राइफल्स भारत-म्यांमार सीमा की प्रभावी निगरानी नहीं कर पा रही है। उनका कहना है कि म्यांमार स्थित कुकी नेशनल आर्मी (बर्मा) के हथियारबंद सदस्य सीमा पार कर नगा गांवों पर लगातार हमले कर रहे हैं।
10 जून को छह अगवा नगा लोगों के क्षत-विक्षत शव मिलने और कामजोंग जिले में कई गांव जलाए जाने के बाद दोनों समुदायों के बीच तनाव और बढ़ गया।
हालांकि असम राइफल्स ने काफिले पर हुए हमले को उग्रवादी संगठनों की हताशा बताया है। सुरक्षा बलों ने हाल के दिनों में कई संयुक्त अभियानों में उग्रवादियों के बंकर ध्वस्त किए हैं, भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है तथा कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना और पुलिस ने राज्यभर में 113 सुरक्षा नाके स्थापित किए हैं। संवेदनशील इलाकों में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि जवानों पर हमला करने वाले उग्रवादी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने तक अभियान जारी रहेगा। साथ ही सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बाधा डालने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।





