Marwahi: न तो राशन कार्ड है न ही रहने को आवास, भूख मिटाने जंगल में तलाशते है भोजन, राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगा आदिवासियों की हालत बद से बदतर, प्रशासन भी नहीं ले रही सुध

बिपत सारथी@मरवाही। (Marwahi) छत्तीसगढ़ के 28 वें जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा आदिवासियों की हालात बद से बदतर है। आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। प्रशासन भी बैगा आदिवासियों की सुध नहीं ले रहा है। सरकार बैगा जनजातियों के विकास के लिए कितने भी बड़े दावे करें पर जमीनी हकीकत देखें तो आज भी सभी दावे की पोल खुलते नजर आता है।
हम बात कर रहे हैं (Marwahi) छत्तीसगढ़ के चर्चित और ऐतिहासिक विधानसभा सीट मरवाही के अंतिम छोर में बसे आदिवासी अंचल कटरा गांव की। जहां राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा जो बदहाली के हालात में बद से बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। जो आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
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बता दे कि(Marwahi) स्वतंत्र भारत के बाद आज भी यहां के बैगा जनजाति अपनी प्यास बुझाने के लिए नदी नाले के पानी पीने को मजबूर हैं। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला बनने के बाद भी यहां के बैगा जनजाति के पास न तो राशन कार्ड है न ही रहने को आवास है। अपनी भूख मिटाने के लिए जंगल में कुछ ना कुछ तलाशते रहते हैं। यहां के बैगा जनजाति की माने तो घुमंतू लोग समझ कर यहां कोई भी प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी नहीं आते हैं। ना ही कोई नेता जनप्रतिनिधि आते हैं। केवल वोट मांगने के समय आते हैं और चुनावी वादा करके चले जाते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इन बैगा आदिवासियों को कब तक मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल पाता है..