Marwahi: इस वजह से टाइगर कॉरिडोर रूट पर जानवर दिखना हुए बंद….दो राज्यों के वन्यजीव हो रहे प्रभावित, जानिए क्या है पूरा मामला
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बिपत सारथी@पेंड्रा। मरवाही वनमंडल के द्वारा टाइगर कॉरीडोर रूट पर मध्यप्रदेश से लगने वाली सीमा पर फेंसिंग वायर कर जानवरों की आवाजाही पर भी रोक लगाने का काम किया है।जबकि कैम्पा मद से करोड़ों रूपये खर्च करने के लिये जंगल में जानवरों को सीमाओं पर रोकने का काम करने से अब इस क्षेत्र में जानवर कम नजर आ रहे हैं। तस्वीरों में भी आप देख सकते हैं कि जिस ऊंची जाली वाली दीवार से जंगल के बीचोंबीच घेराबंदी का काम किया गया है। यह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा रेखा है। इस क्षेत्र को मध्यप्रदेश के कान्हा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से छत्तीसगढ़ अचानकमार टाईगर रिजर्व को जोड़ने वाले क्षेत्र के कारण टाइगर कॉरीडोर रूट के रूप में चिन्हांकित किया गया है। जहां ऐसे प्रयास किये जाने थे कि एक टाइगर रिजर्व से दूसरे टाइगर रिजर्व क्षेत्र में टाइगर सहित अन्य वन्य जीव आसानी से विचरण कर सके। पर मरवाही वनमंडल ने कैंपा मद से करीब 84 लाख रूपये खर्च कर घने जंगल के बीचोबीच ये ऐसी दीवार खड़ी कर दी। अब न इसके इस पार और उस पार नहीं जा रहे हैं।
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ज्वालेश्वर रोड सहित अन्य जगहों पर कई किलोमीटर लंबी यह जाली की दीवार अब जानवरों को भी राज्य की सीमाओं में नियंत्रित कर रही है। परिणाम अब यह हो रहा है कि वन्यजीव अब आसपास भी नजर नहीं आ रहे हैं। इस विभाजन के चलते दोनो राज्यों के वन्यजीवों के लिये इस प्रकार का विभाजन जरा भी उचित नहीं माना जा रहा है।
वहीं मरवाही डीएफओ नें इस संबंध में जानकारी दी कि 84 लाख की लागत से ज्वालेश्वर सहित कुछ अन्य जगहों पर ये फेंसिंग का काम कराया गया है। अगर इससे दोनों राज्यों के वन्यजीव प्रभावित हो रहे हैं तो इस पर ध्यान दिया जाएगा। जिससे वन जीव एक राज्य से दूसरे राज्य की सीमाओं से लगे वनक्षेत्र में विचरण कर सकेंगे।