मनरेगा के तहत छत्तीसगढ़ को बड़ी सौगात: 1333 करोड़ स्वीकृत, 212 करोड़ मजदूरी का भुगतान

रायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत छत्तीसगढ़ को बड़ी राहत मिली है। राज्य की मांग और लंबित देनदारियों को ध्यान में रखते हुए कुल 1333 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इससे लाखों ग्रामीण श्रमिक परिवारों को सीधा फायदा मिलने वाला है।

स्वीकृत राशि में से 800 करोड़ रुपए से अधिक मजदूरी भुगतान के लिए जारी किए गए हैं। यह भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए पारदर्शी तरीके से श्रमिकों के बैंक खातों में भेजा जा रहा है। अब तक राज्य के श्रमिकों के खातों में 212 करोड़ रुपए की मजदूरी राशि जमा की जा चुकी है, जबकि शेष राशि भी जल्द चरणबद्ध तरीके से ट्रांसफर की जाएगी।

सरकार का मानना है कि इस भुगतान से न सिर्फ श्रमिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। मजदूरी का समय पर भुगतान होने से ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

राज्य में चल रहे “मोर गांव मोर पानी महा अभियान” के तहत जल संरक्षण और आजीविका से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। मनरेगा के माध्यम से आजीविका डबरी, नवा तरिया और अन्य जल संरक्षण कार्य बड़े पैमाने पर स्वीकृत किए जा रहे हैं। इन योजनाओं से भू-जल स्तर में सुधार, सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है।

मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मनरेगा के जरिए रोजगार सृजन, ग्रामीण अधोसंरचना के विकास और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार से मिली यह वित्तीय स्वीकृति छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों को नई रफ्तार देगी। साथ ही यह पहल श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार और गांवों में स्थायी आजीविका के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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