दिल्ली। चेन्नई स्थित मद्रास हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने को लेकर एक अहम याचिका पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से जवाब मांगा है। अदालत ने नोटिस जारी करते हुए आयोग को निर्देश दिया कि वह इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करे।
यह याचिका अर्जुन संपत द्वारा दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि SC आरक्षित सीटों पर केवल उन्हीं उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए, जो अनुसूचित जाति से हों और हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानते हों। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह प्रावधान संविधान और संबंधित कानूनों के अनुरूप होना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इसे आगे के लिए स्थगित कर दिया और ECI को जवाब दाखिल करने का समय दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिया जा सकता।
याचिकाकर्ता ने अपनी दलीलों में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(2) और संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 का हवाला दिया। साथ ही हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी जिक्र किया गया, जिनमें धर्म परिवर्तन के बाद SC दर्जे को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है।
इसी सुनवाई के दौरान अदालत ने एक अन्य याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्नों के दुरुपयोग को रोकने के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई थी। इसके अलावा नामांकन की समय सीमा बढ़ाने से जुड़ी एक जनहित याचिका भी खारिज कर दी गई।
यह मामला अब कानूनी और संवैधानिक बहस का विषय बन गया है, जिसका असर आगामी चुनावों की प्रक्रिया और पात्रता मानकों पर पड़ सकता है।
