रायपुर। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026-27 के लिए विद्युत टैरिफ में संशोधन के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने के लिए राज्य सरकार ने कई राहत योजनाएं लागू की हैं। विद्युत नियामक आयोग द्वारा औसतन 6.23 प्रतिशत यानी करीब 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि स्वीकृत की गई है, लेकिन सब्सिडी, बिजली बिल समाधान योजना और सौर ऊर्जा योजनाओं के कारण अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।
विद्युत दरों का निर्धारण छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा किया जाता है। आयोग बिजली उत्पादन, कोयला लागत, ट्रांसमिशन और वितरण खर्च सहित विभिन्न आर्थिक पहलुओं का अध्ययन करने के बाद टैरिफ तय करता है। नए टैरिफ में घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक वृद्धि की गई है।
प्रदेश में करीब 51 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है। वहीं 26.5 लाख उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक मासिक खपत पर 200 यूनिट तक 50 प्रतिशत छूट का लाभ मिल रहा है। इन योजनाओं के कारण करीब 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का असर शून्य से लेकर मात्र 3.65 प्रतिशत तक सीमित रहेगा।
किसानों पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त भार
राज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट वृद्धि की गई है, लेकिन इसका भुगतान राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में करेगी। इससे किसानों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं आएगा। कृषि पंपों का स्थायी शुल्क भी यथावत रखा गया है।
सौर ऊर्जा से बिजली बिल में राहत
प्रदेश में पीएम सूर्यघर योजना के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक करीब 66 हजार उपभोक्ता इस योजना का लाभ ले चुके हैं। इनमें 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो चुका है। वहीं करीब 89 हजार घरों में सोलर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया जारी है। सरकार ने आने वाले वर्षों में 5 लाख घरों में सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है।
बिजली बिल समाधान योजना से मिली राहत
मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिलों में राहत दी जा रही है। बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत और सरचार्ज में पूरी छूट दी जा रही है। घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल राशि में 50 प्रतिशत तथा सरचार्ज में पूरी छूट का लाभ मिल रहा है।
योजना के तहत अब तक लाखों उपभोक्ता आवेदन कर चुके हैं और करीब 1328 करोड़ रुपए के बकाया बिलों का समाधान किया जा चुका है। इसमें उपभोक्ताओं को लगभग 749 करोड़ रुपए की राहत मिली है।
उद्योग और ऊर्जा व्यवस्था को मजबूती
राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास को ध्यान में रखते हुए स्टील उद्योगों को मिलने वाली 25 प्रतिशत लोड फैक्टर छूट जारी रखी है। वहीं बस्तर और सरगुजा क्षेत्रों के छात्रावासों को घरेलू श्रेणी में शामिल कर राहत दी गई है।
ऊर्जा बचत को बढ़ावा देने के लिए 10 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय में बिजली उपयोग पर 5 प्रतिशत छूट दी जाएगी। इसके अलावा राज्य में बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था मजबूत करने के लिए नए विद्युत संयंत्र और उपकेंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
सरकार का कहना है कि बिजली दरों में संशोधन के बावजूद राहत योजनाओं और सब्सिडी के माध्यम से आम उपभोक्ताओं के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। ऊर्जा क्षेत्र में किए जा रहे निवेश से भविष्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
