छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में गायत्री मंत्र पाठ पर विवाद, कांग्रेस और अल्पसंख्यक संगठनों ने जताई आपत्ति

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्रार्थना के दौरान गायत्री मंत्र सहित अन्य पारंपरिक मंत्रों के पाठ को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।

स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में सरकारी स्कूलों में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ गायत्री मंत्र, दीप मंत्र, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रार्थनाओं को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश 12 जून को जारी किया गया है।

राज्य सरकार के इस निर्णय का कांग्रेस और कई अल्पसंख्यक संगठनों ने विरोध किया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

सिंहदेव ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। किसी भी धार्मिक मंत्र का उच्चारण या पालन व्यक्ति की आस्था और इच्छा पर निर्भर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी धार्मिक परंपरा को अनिवार्य रूप से लागू किया जाता है तो यह संविधान की भावना के विपरीत होगा।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने की स्वतंत्रता है, लेकिन किसी भी धर्म या परंपरा को दूसरे समुदायों पर थोपना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जो विद्यार्थी या लोग इसमें शामिल नहीं होना चाहते, उन्हें इससे अलग रहने की अनुमति दी जानी चाहिए।

वहीं कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ और रहनुमा एजुकेशन सोसाइटी ने भी इस आदेश का विरोध किया है। संगठनों ने सरगुजा कलेक्टर के माध्यम से शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर आदेश वापस लेने की मांग की।

कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रशीद अंसारी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, बेरोजगारी, महंगाई और अन्य समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन स्कूलों को धार्मिक और राजनीतिक विवादों का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए।

अंबिकापुर शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह धंजल ने भी आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक उद्देश्यों से प्रभावित कर रही है। उन्होंने आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की।

इस मामले में अब सरकार के रुख और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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