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कुँवरगढ़ महोत्सव: लोक-आस्था, परंपरा और विकास का भव्य संगम

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक जड़ों को सींचने और विकास की नई इबारत लिखने के उद्देश्य से धरसींवा में ‘कुँवरगढ़ महोत्सव’ का शानदार आगाज हुआ।

31 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महोत्सव का शुभारंभ करते हुए क्षेत्र को 136 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए ग्राम कूंरा का नाम बदलकर ‘कुँवरगढ़’ करने का निर्णय लिया, जो यहाँ के गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करेगा।

“जहाँ संस्कृति का सम्मान, वहीं से विकास”

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “जहाँ संस्कृति का सम्मान होता है, वहीं से विकास की नई शुरुआत होती है।” बस्तर और सिरपुर महोत्सव की तर्ज पर अब कुँवरगढ़ महोत्सव भी छत्तीसगढ़ की लोक-आस्था और पहचान का प्रतीक बनेगा। इस दौरान उन्होंने नवनिर्मित तहसील कार्यालय का लोकार्पण भी किया, जिससे स्थानीय नागरिकों को राजस्व कार्यों में बड़ी सुविधा मिलेगी।

क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणाएं

विकास की गति को तेज करने के लिए मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

  • आधारभूत संरचना: गौरवपथ निर्माण और टेकारी-नयापारा मार्ग का चौड़ीकरण।
  • जल संरक्षण व पर्यटन: रानीसागर तालाब का सौंदर्यीकरण और खारून नदी पर एनीकट निर्माण।
  • सुरक्षा व खेल: नई पुलिस चौकी की स्थापना और खेल मैदान का उन्नयन।

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

प्राचीन काल में यह क्षेत्र आदिवासी शासक राजा कुँवर सिंह गोंड के साम्राज्य का केंद्र था। चारों दिशाओं में माता कंकालिन, चंडी, महामाया और भगवान चतुर्भुजी की उपस्थिति इसे आध्यात्मिक रूप से विशेष बनाती है। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ को प्रभु श्री राम का ननिहाल और महान संतों की तपोभूमि बताते हुए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया।

धरसींवा विधायक अनुज शर्मा की पहल की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन क्षेत्रीय पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करते हैं। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों सहित हजारों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने इस सांस्कृतिक और विकासपरक महाकुंभ का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

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