मरवाही। गांव की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता अब सिर्फ सपना नहीं रह गया है। सही अवसर, मार्गदर्शन और मेहनत के जरिए महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत मंझगवा की श्रीमती कमलेश यादव ने भी अपनी मेहनत और हुनर से यह साबित किया है। कभी छोटे व्यवसाय का सपना देखने वाली कमलेश आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।
कमलेश यादव वंदना महिला स्वसहायता समूह से जुड़ीं और अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। समूह के माध्यम से उन्हें आरएफ, सीआईएफ और बैंक ऋण के जरिए आर्थिक सहयोग मिला। इन संसाधनों का उपयोग कर उन्होंने गांव में चिकन स्टोर शुरू किया। इसके साथ ही अपनी सिलाई का काम भी जारी रखा।
दो आय के साधनों से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति
चिकन स्टोर और सिलाई से होने वाली आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया। लगातार मेहनत और व्यवसाय के प्रति लगन के चलते उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपए से अधिक हो गई। इसके साथ ही उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा।
कमलेश बताती हैं कि महिला स्वसहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। समूह से उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ आगे बढ़ने का अवसर और आत्मविश्वास मिला। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल व्यवसाय शुरू करने और अपने हुनर को आय के साधन में बदलने के लिए किया।
दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
कमलेश की कहानी ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वसहायता समूहों की भूमिका को भी सामने लाती है। समूहों के जरिए महिलाएं बैंक ऋण और आजीविका गतिविधियों से जुड़कर छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं। कमलेश ने भी इसी सहयोग को अपनी मेहनत के साथ जोड़कर आत्मनिर्भरता की राह बनाई।
‘लखपति दीदी’ बनने के बाद कमलेश अब गांव की दूसरी महिलाओं को भी स्वसहायता समूहों से जुड़ने और अपनी रुचि व हुनर के मुताबिक व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं के लिए मिल रहे शासकीय सहयोग के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया।
कमलेश की सफलता बताती है कि यदि मेहनत के साथ सही अवसर और सहयोग मिले, तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक तस्वीर बदलने के साथ समाज में आत्मनिर्भरता की मिसाल भी कायम कर सकती हैं।
