25 साल बाद फिर शुरू हुई कोरंडम खदान, सीएम साय की मौजूदगी में वैल्यू चेन विकसित करने CMDC-विश्वविद्यालय में एमओयू

रायपुर। नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CMDC) ने बीजापुर जिले के कुचनूर क्षेत्र में करीब 25 साल बाद कोरंडम खदान का दोबारा संचालन शुरू किया है।

कोरंडम के खनन से लेकर कटिंग-पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में CMDC और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच एमओयू हुआ। विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। इसके जरिए स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

वैज्ञानिक तरीके से हो रहा खनन

भोपालपट्टनम क्षेत्र के ग्राम कुचनूर में छत्तीसगढ़ कोरंडम माइन्स लिमिटेड के माध्यम से फरवरी 2025 से खदान का संचालन फिर शुरू हुआ। यहां वैज्ञानिक पद्धति से उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का उत्खनन किया जा रहा है। वर्तमान में करीब 240 किलो कोरंडम का भंडारण है, जिसमें 157.643 किलो परिवहन किया जा चुका है।

14 स्थानीय युवाओं को रोजगार

खदान शुरू होने से बीजापुर के 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिले हैं। सरकार का लक्ष्य खनन का लाभ स्थानीय समुदाय, युवाओं, शिल्पकारों और उद्यमियों तक पहुंचाना है।

कटिंग-पॉलिशिंग और जेम्स्टोन हैंडलिंग का प्रशिक्षण देकर स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे युवाओं को रोजगार के साथ अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर भी मिलेगा।

‘बस्तर ब्रांड’ से बाजार तक पहुंचेगा कोरंडम

कुचनूर के कोरंडम को ‘बस्तर ब्रांड’ से जोड़कर स्थानीय डिजाइन, गुणवत्ता और प्रमाणिकता के साथ आभूषण एवं रत्न उत्पाद तैयार करने की योजना है। इनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग से बस्तर की खनिज संपदा को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार पहचान मिल सकती है। नए कोरंडम क्षेत्रों की पहचान और अन्वेषण भी जारी है। पारदर्शी नीलामी से राजस्व बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

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