रायपुर। भारत तेजी से डिजिटल प्रशासन की ओर अग्रसर है और इसी दिशा में छत्तीसगढ़ ने राजस्व न्याय व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए “राजस्व ई-कोर्ट परियोजना” को लागू किया है।
यह पहल अब केवल एक तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाने का सशक्त माध्यम बन चुकी है।
वर्षों तक नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, फौती, खाता सुधार और भूमि विवाद जैसे मामलों में आम लोगों को तहसील, एसडीएम और कलेक्टर कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
इससे समय, धन और ऊर्जा की भारी बर्बादी होती थी। कई बार बिचौलियों और अनावश्यक देरी की समस्या भी सामने आती थी। लेकिन अब राजस्व ई-कोर्ट प्रणाली ने पूरी व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर “पेपरलेस” और “स्मार्ट गवर्नेंस” की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है।
नायब तहसीलदार से लेकर कलेक्टर और राजस्व मंडल तक की न्यायिक प्रक्रिया अब ऑनलाइन संचालित हो रही है। आवेदन प्राप्त होते ही डिजिटल पावती जारी होती है और पूरी कार्यवाही ऑनलाइन दर्ज की जाती है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और जवाबदेही सुनिश्चित हुई है।
इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि ई-कोर्ट व्यवस्था सुशासन की दिशा में एक प्रभावी कदम है, जिसका उद्देश्य प्रशासन को सरल, पारदर्शी और जनकेंद्रित बनाना है।
ई-कोर्ट प्रणाली के माध्यम से नागरिक मोबाइल या कंप्यूटर पर अपने प्रकरण की स्थिति, अगली सुनवाई और आदेश की जानकारी आसानी से देख सकते हैं। इससे कार्यालयों में भीड़ कम हुई है और लोगों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिली है।
ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए यह व्यवस्था विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है। अब वे लोक सेवा केंद्र या मोबाइल के माध्यम से अपने राजस्व मामलों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे समय और लागत दोनों की बचत हो रही है।
इसके अलावा विचाराधीन भूमि विवादों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होने से फर्जीवाड़ा और अवैध भूमि लेनदेन पर रोक लगी है। डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित सर्वर में संरक्षित होने से पारदर्शिता और अधिक मजबूत हुई है।
तकनीकी आधारभूत संरचना जैसे कंप्यूटर, इंटरनेट और डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली के विस्तार से न्यायालयों की कार्यक्षमता बढ़ी है। उच्च अधिकारी अब ऑनलाइन निगरानी भी कर सकते हैं, जिससे प्रशासनिक नियंत्रण बेहतर हुआ है।
राजस्व ई-कोर्ट परियोजना वास्तव में “मोबाइल में न्यायालय” की अवधारणा को साकार कर रही है। यह पहल छत्तीसगढ़ को डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है और “गढ़बो नवा छत्तीसगढ़” के विजन को मजबूत आधार प्रदान करती है।
