‘ज्यूडीशियल करप्शन’ विवाद: NCERT ने माफी मांगी, विवादित चैप्टर को फिर से लिखा जाएगा

दिल्ली। कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, भाग 2’ में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय में ‘भ्रष्टाचार’ का उल्लेख होने के बाद विवाद बढ़ गया।

नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने बुधवार को कहा कि यह गलती अनजाने में हुई है। एनसीईआरटी ने किताब की बिक्री पर रोक लगा दी है और विवादित चैप्टर को फिर से लिखा जाएगा।

एनसीईआरटी ने बताया कि 24 फरवरी को कक्षा 8 के छात्रों के लिए सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक जारी की गई थी। इसमें ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ अध्याय के तहत न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लंबित मामलों की संख्या और न्यायाधीशों की कमी जैसी चुनौतियों का जिक्र किया गया था।

एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संवैधानिक संस्था के अधिकार पर सवाल उठाना नहीं था। नई पाठ्यपुस्तक का मकसद छात्रों में संवैधानिक साक्षरता, संस्थागत सम्मान और लोकतांत्रिक भागीदारी की जानकारी बढ़ाना था।

किताब में केंद्रीय शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) का उल्लेख भी किया गया था, जिसमें बताया गया कि 2017 से 2021 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतें मिली थीं।

इसके साथ ही गंभीर मामलों में न्यायाधीशों को हटाने के संवैधानिक नियम और न्यायपालिका की आंतरिक जवाबदेही की जानकारी भी दी गई थी। पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई का भी उल्लेख किया गया, जिन्होंने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के मामलों के पब्लिक ट्रस्ट पर असर की चिंता जताई थी।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया और कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बाद एनसीईआरटी ने चैप्टर को सही सलाह के साथ फिर से लिखने का निर्णय लिया। नई पाठ्यपुस्तक अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में छात्रों को उपलब्ध कराई जाएगी।

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