दिल्ली। राजस्थान की एक्सप्रेस ट्रेनों के AC कोच में शराब की अवैध बिक्री का मामला सामने आया है। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि यात्रियों को लंच और डिनर की तरह एडवांस ऑर्डर देकर मनचाही शराब सीट पर मिल जाती है। स्टाफ और ट्रेन में तैनात वेंडर इस अवैध नेटवर्क में शामिल हैं, जिससे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है।
मीडिया रिपोट्र्स के अनुसार चार अलग-अलग ट्रेनों में यह स्टिंग ऑपरेशन किया। मरुधर एक्सप्रेस (जोधपुर-वाराणसी) में थर्ड AC कोच में टिकट बुक कर यात्रा के दौरान अटेंडेंट अनुराग ने कुछ ही समय में शराब पहुंचा दी।
उन्होंने मोबाइल नंबर देकर अगली यात्रा में एडवांस बुकिंग की सुविधा भी दी। अटेंडेंट ने बताया कि बिना टिकट वाले यात्रियों से अतिरिक्त कमाई होती है और पैसेंजर से लिया गया कमीशन स्टाफ में बंट जाता है।
रणथंभौर एक्सप्रेस (जयपुर-जोधपुर) में भी अटेंडेंट विजयपाल ने मोबाइल पर शराब की बोतल मंगवाने का तरीका बताया। ट्रेन के फुलेरा जंक्शन पर बोतल उपलब्ध करवाई जाती थी। चिप्स, समोसा बेचने वाले वेंडर भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं।
रेलवे एक्ट और भारतीय दंड संहिता के अनुसार ट्रेन में शराब लाना और बेचना गैरकानूनी है। प्लेटफॉर्म या ट्रेन में शराब पीने पर धारा 145 और 292 के तहत 1,000 रुपए जुर्माना या छह महीने की जेल हो सकती है। बीएनएस-151 के तहत ट्रेन में शराब पीने पर गिरफ्तारी भी संभव है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के सीनियर सीपीआरओ शशि किरण ने बताया कि यह बिल्कुल गैरकानूनी है। अगर रिपोर्ट में सबूत भेजे जाएंगे तो स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे के एसी कोच अटेंडेंट यात्रियों की सुविधा और मदद के लिए तैनात होते हैं। उनका काम कंबल, चादर, तकिए की व्यवस्था करना और कोच की साफ-सफाई देखना होता है। लेकिन कई अटेंडेंट एक्स्ट्रा कमाई के लिए शराब बेचने में शामिल हैं।
मीडिया की पड़ताल ने दिखाया कि राजस्थान की ट्रेनों में शराब की यह अवैध बिक्री बड़ी मात्रा में और व्यवस्थित तरीके से हो रही है, जो यात्रियों की सुरक्षा और कानून की अवहेलना दोनों को दर्शाता है।
