सरगुजा-अंबिकापुर

Corona संक्रमित मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही, जब पीपीई किट पहनकर परिजन पहुंचे अंदर….

शिव शंकर साहनी@अंबिकापुर। (Corona) मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां कोविड मरीज की इलाज के दौरान मौत होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने की सूचना परिजनों को नहीं दी। जब परिजन पीपीईकीट पहनकर मरीज से मिलने वार्ड के अंदर गए तो इस मामले का खुलासा हुआ है। (Corona) वहीं इस मामले में अस्पताल अधीक्षक ने जांच कर कार्यवाही  करने का आश्वासन दिया है।

(Corona)  कोविड संकट के बीच अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आए दिन मरीजों की मौत हो रही है। मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल प्रबंधन रात दिन लगा हुआ है। लेकिन लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या की वजह से कहीं न कहीं अस्पताल प्रबंधन से चूक भी हो रही है। इसी कड़ी में एक मामला सामने आया है। जहां अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई।

दरअसल बिश्रामपुर के सतपता निवासी एक व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने के बाद परिजन उसे इलाज के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर आए थे। उसकी हालत गंभीर दे चिकित्सकों ने उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करा दिया। वही जांच उपरांत 2 दिनों बाद मरीज की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इधर मरीज की बिगड़ती हालत दे चिकित्सक उसे बेहतर उपचार के लिए आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिए।

यहां मरीज का बीते कई दिनों से उपचार चल रहा था। लेकिन इलाज के दौरान मरीज की रविवार दोपहर लगभग 1:30  बजे मौत हो गई। बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के परिजनों को इस घटना की सूचना नहीं दी। जबकि मरीज के पुत्र ने पिता की अस्पताल में भर्ती के दौरान रजिस्ट्रेशन में अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड करवाया था। वहीं मृतक के पुत्र का आरोप है कि रविवार की शाम जब वह खाना पहुंचाने अस्पताल पहुंचा था तो इस दौरान भी पिता के मौत की सूचना अस्पताल प्रबंधन ने उसे नही दी।

यही नहीं मरीज तक खाना पहुंचाने की बात कह कर पुत्र को अस्पताल से वापस लौटा दिया गया। इस दौरान परिजन कई बार मरीज से मोबाइल के जरिए संपर्क साधना की कोशिश किये लेकिन उसका मोबाइल नंबर स्विच ऑफ बता रहा था। वही मृतक का पुत्र सोमवार की सुबह एक बार फिर नाश्ता पहुंचाने अस्पताल पहुंचा। इस दौरान पुत्र ने आईसीयू में भर्ती पिता के मोबाइल नंबर पर फिर फोन लगाया लेकिन इस  बार भी फोन स्विच ऑफ था। वही जब परिजनों को अनहोनी का अंदेशा हुआ तो वे खुद पीपीईकीट पहनकर मरीज से मिलने आईसीयू में पहुंच गए। लेकिन मरीज आईसीयू में मौजूद नहीं था। इसके बाद परिजनों ने जब इस मामले की छानबीन की तो पता चला कि रविवार की दोपहर लगभग 1:30 बजे मरीज की मौत हो चुकी थी वही उसके शव हो आईसीयू से निकाल कर मरक्यूरी में रख दिया गया था।

अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही की वजह से मृतक के परिजन परेशान होते रहे लेकिन ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक एवं अन्य कर्मचारियों ने परिजनों को इस घटना की जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा। यही नहीं कागजी कार्रवाई की वजह से सोमवार को भी परिजनों को शव लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। वहीं इस मामले के सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर लखन सिंह का कहना है कि इस घटना की जांच कराई जाएगी  जांच पूरी होने के बाद कार्यवाही भी होगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि जिला प्रशासन की लाख निगरानी के बावजूद इस तरह की चूक मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन से कैसे हो रही है जिस वजह से परिजनों को दुःखो के पहाड़ के बीच परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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