नई पीढ़ी को साहित्य की समझ सिखाने साहित्य उत्सव जरूरी: उपसभापति हरिवंश

रायपुर। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक, बौद्धिक और वैचारिक चेतना को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने के उद्देश्य से पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव–2026 के पहले दिन एक महत्वपूर्ण संवाद सत्र हुआ।
इस सत्र में राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश और साहित्य आज तक के संपादक जयप्रकाश पाण्डेय के बीच साहित्य, समाज और विकास के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। यह संवाद अनिरुद्ध नीरव मंडप में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, विद्यार्थी और बुद्धिजीवी मौजूद रहे।
संवाद के दौरान श्री हरिवंश ने रायपुर साहित्य उत्सव की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को साहित्य की समझ देने के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान का साहित्य ही समाज को एक सूत्र में पिरोने की ताकत रखता है। साहित्य अलग-अलग विचारों, समाजों और राज्यों के बीच मौजूद वैचारिक टकराव को समाप्त करने का माध्यम बन सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की साहित्यिक परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। हमारे गांवों, राज्यों और देश में अनेक ऐतिहासिक धरोहरें, महान लेखक और विचारक हुए हैं, जिन पर हमें गर्व होना चाहिए। लेकिन आज हम विदेशी प्रभाव में आकर अपने ही साहित्य और विरासत को कम आंकने लगे हैं। यह हीनता बोध तभी समाप्त होगा, जब रायपुर साहित्य उत्सव जैसे आयोजन देश के हर जिले और हर राज्य में होंगे। उन्होंने लेखकों से आग्रह किया कि वे अपने गांवों, संस्कृति और स्थानीय धरोहरों पर अधिक से अधिक लिखें।
देश की विकास यात्रा पर बात करते हुए श्री हरिवंश ने कहा कि भारत आज मशाल जलाकर दुनिया को रास्ता दिखा रहा है। वर्ष 2014 के बाद भारत ने विकास की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। किसी भी देश के विकास का असली पैमाना उसके गांव और अंतिम व्यक्ति की स्थिति से तय होता है। उन्होंने कहा कि आज गांवों में पक्के मकान बने हैं और डिजिटल क्रांति के तहत पूरे देश में यूपीआई जैसी सुविधाएं आम हो चुकी हैं। यह बदलाव भारत की मजबूत होती विकास गाथा को दर्शाता है।





