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RTE एडमिशन पर हाईकोर्ट सख्त: 400 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं, पूछा- क्या गरीब बच्चे बड़े स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत गरीब बच्चों के एडमिशन को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर सख्त नाराजगी जताई है।

गुरुवार को हुई सुनवाई में सरकार ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के करीब 387 स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिले के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है। वहीं 366 स्कूल ऐसे हैं, जहां सीटों की तुलना में आवेदन बेहद कम मिले हैं। इनमें कई बड़े और नामी स्कूल शामिल हैं।

इस जानकारी पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने हैरानी जताते हुए पूछा कि क्या गरीब बच्चे बड़े स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते या फिर राज्य सरकार कुछ छिपा रही है। कोर्ट ने शिक्षा सचिव को 10 जुलाई तक शपथ पत्र के साथ पूरी जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, RTE कानून से जुड़ी जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जो शपथ पत्र पेश किया, उसमें कई स्कूलों में सिर्फ एक या दो बच्चों के एडमिशन की जानकारी दी गई थी।

इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी स्कूल में केवल एक बच्चे का दाखिला हुआ है, तो क्या वहां कुल चार बच्चे ही पढ़ते हैं। जबकि कानून के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है।

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि RTE के तहत स्कूलवार सीटों और एडमिशन की पूरी जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक की जाए।

कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, तब गरीब बच्चों के प्रवेश में इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि प्रशासनिक लापरवाही से हजारों बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

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