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कुम्हार की आजीविका पर रोक लगाने वाले नायब तहसीलदार के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाया स्टे, कलेक्टर से मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर उच्च न्यायालय ने दुर्ग जिले के एक कुम्हार की आजीविका रोकने के मामले में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने पाटन के नायब तहसीलदार द्वारा जारी स्थगन आदेश पर रोक लगाते हुए कलेक्टर दुर्ग समेत अन्य प्रतिवादी अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

अब पढ़े क्या है पूरा मामला

ग्राम कौही (तहसील पाटन) निवासी कुमोद प्रजापति पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन, सुराही और मटके बनाने का पारंपरिक कार्य कर रहे हैं। गांव के उपसरपंच और एक हेडमास्टर की शिकायत पर नायब तहसीलदार ने 26 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी कर उनके इस पुश्तैनी काम पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली।

अदालत में याचिकाकर्ता के तर्क

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि नायब तहसीलदार की कार्यवाही विधि विरुद्ध है, क्योंकि, याचिकाकर्ता को बिना कोई नोटिस दिए या सुनवाई का मौका दिए सीधे काम रोकने का आदेश दे दिया गया।

शासन के नियमानुसार, कुम्हार जाति को 10 लाख रुपये तक की रॉयल्टी से मुक्त रखा गया है। वर्ष 2006 के एक सरकारी निर्देश के अनुसार, प्रत्येक ग्राम पंचायत में कुम्हारों के लिए 5 एकड़ भूमि आरक्षित की जानी थी, जिसका पालन आज तक नहीं किया गया।

हाईकोर्ट की नाराजगी और आदेश

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने खनिज विभाग के अधिकारियों और नायब तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस कानूनी आधार के किसी की आजीविका नहीं छीनी जा सकती।

नायब तहसीलदार पाटन के आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। कलेक्टर दुर्ग, तहसीलदार पाटन, खनिज विभाग और शिकायतकर्ता उपसरपंच को नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई तक कुमोद प्रजापति को अपना पारंपरिक कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई है।

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