रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा बुनकर संघ की वार्षिक आमसभा में वर्ष 2026-27 के लिए 280.23 करोड़ रुपए का अनुमानित बजट ध्वनिमत से पारित किया गया।
बैठक में शासकीय विभागों से प्राप्त मांग-आदेशों में लगातार आ रही कमी पर गंभीर चिंता जताते हुए विपणन तंत्र को सशक्त बनाने और बुनकर हितों की रक्षा के लिए कई अहम निर्णय लिए गए।
वीआईपी चौक स्थित एक निजी होटल में संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन की अध्यक्षता में आयोजित आमसभा में 13 जिलों से 96 प्रतिनिधि शामिल हुए।
वर्ष 2024-25 के वित्तीय प्रतिवेदन तथा 31 जनवरी 2026 तक के आय-व्यय का अनुमोदन करते हुए आगामी वर्ष की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई।
बैठक में विभागीय मांग-आदेशों में कमी को संघ के लिए बड़ी चुनौती बताया गया। प्रतिनिधियों ने अधिक समन्वय कर आदेश बढ़ाने, निष्क्रिय समितियों की सदस्यता समाप्त करने, बुनाई मजदूरी और सेवा प्रभार में वृद्धि की मांग रखी।
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्याम धावड़े ने बताया कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एनआईसी के माध्यम से ऑनलाइन इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया गया है, जिससे विभाग वस्त्र स्टॉक की जानकारी ऑनलाइन देख सकेंगे।
कोसा और कॉटन उत्पादों के मूल्य संवर्धन हेतु निफ्ट डिज़ाइनरों की सेवाएं ली जाएंगी तथा ऑनलाइन मार्केटिंग के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया जाएगा।
‘बिलासा’ शोरूम का विस्तार जगदलपुर के बाद अम्बिकापुर, रायगढ़, बिलासपुर सहित अन्य शहरों और मुंबई, दिल्ली जैसे महानगरों तक करने का प्रस्ताव रखा गया।
ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि राज्य सरकार हाथकरघा क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाने और बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
