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जनजातीय जड़ों से अंतर्राष्ट्रीय फलक तक: छत्तीसगढ़ की स्टार फुटबॉलर किरण पिस्दा के संघर्ष की कहानी

रायपुर। बस्तर की वादियों से निकलकर यूरोप के फुटबॉल मैदानों तक का सफर तय करने वाली किरण पिस्दा आज भारतीय महिला फुटबॉल का एक चमकता सितारा हैं। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में छत्तीसगढ़ को स्वर्ण पदक दिलाने वाली कप्तान किरण की कहानी केवल पदकों की नहीं, बल्कि अटूट संकल्प और बार-बार गिरकर संभलने की है।

बहुमुखी प्रतिभा: स्ट्राइकर से गोलकीपर तक

24 वर्षीय किरण की सबसे बड़ी ताकत उनकी ‘वर्सेटैलिटी’ (बहुमुखी प्रतिभा) है। उन्होंने एक स्ट्राइकर के रूप में करियर शुरू किया, मिडफील्ड में अपनी धाक जमाई और अब राष्ट्रीय टीम के लिए फुल-बैक के रूप में खेलती हैं। इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जब टीम मुश्किल में थी, तो किरण ने गोलकीपिंग के दस्ताने पहनकर अपनी टीम को जीत दिलाई। वह कहती हैं, “एक खिलाड़ी को टीम की जरूरत के हिसाब से हर पोजीशन के लिए तैयार रहना चाहिए।”

असफलता से सीखा आत्म-सुधार का पाठ

किरण का सफर आसान नहीं था। शुरुआती राष्ट्रीय शिविरों में चयन न होने पर वह टूटी नहीं, बल्कि अपनी कमियों पर काम किया। रायपुर में शारीरिक शिक्षा की पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपनी फिटनेस और मानसिक मजबूती को नया स्तर दिया। कोच योगेश कुमार जांगड़ा के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी नकारात्मकता को पीछे छोड़ा। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने केरल ब्लास्टर्स जैसे प्रतिष्ठित क्लबों और फिर क्रोएशियन महिला लीग में ‘डिनामो ज़ाग्रेब’ के लिए खेलकर इतिहास रचा।

संघर्ष और वापसी का जज्बा

2022 सैफ (SAFF) चैंपियनशिप का हिस्सा रहीं किरण को हाल ही में एशियन कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में जगह नहीं मिली, लेकिन उनका नजरिया अब बदल चुका है। किरण कहती हैं, “बड़े टूर्नामेंट में चयन न होना दुख देता है, लेकिन मैं इसे और मजबूत वापसी की प्रेरणा मानती हूं। चयन न होने का मतलब यह नहीं कि आप बुरे खिलाड़ी हैं, बल्कि आपको और मेहनत की जरूरत है।”

नया भारत और जनजातीय प्रतिभा

किरण मानती हैं कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच बस्तर और अन्य दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाओं के लिए मील का पत्थर हैं। उनके अनुसार, जनजातीय क्षेत्रों में हुनर की कमी नहीं है, बस सही मौके की तलाश है। आज किरण न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश की उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं, जो फुटबॉल के जरिए अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। उनका अगला लक्ष्य भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करना और तिरंगे को वैश्विक मंच पर ऊंचाइयों तक ले जाना है।

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