विदेशी डिग्री अब भारत में: 15 विदेशी यूनिवर्सिटी खोलेंगी कैंपस, अगस्त से पहला बैच; पढ़ाई का खर्च 30-40% तक होगा कम

नई दिल्ली। भारतीय छात्रों को अब विदेशी विश्वविद्यालयों की डिग्री हासिल करने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं होगी। केंद्र सरकार ने अब तक 15 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) जारी कर दिया है। इनमें से अधिकांश संस्थान अगस्त 2026 से अपना पहला शैक्षणिक सत्र शुरू करेंगे। शुरुआती चरण में प्रत्येक कैंपस में 200 से 250 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा, जिसे अगले पांच वर्षों में बढ़ाकर 1,000 से 1,200 छात्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु में यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन, ब्रिस्टल, यॉर्क, इलिनोइस टेक, लिवरपूल और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अपने कैंपस स्थापित कर रहे हैं। इन विश्वविद्यालयों को मौजूदा सत्र के लिए 10 हजार से अधिक आवेदन मिल चुके हैं।
भारतीय कैंपस में पढ़ाई, परीक्षा, मूल्यांकन और डिग्री पूरी तरह संबंधित विदेशी विश्वविद्यालय के होम कैंपस के वैश्विक मानकों के अनुसार होगी। पहले चरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंप्यूटर साइंस और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) जैसे विषयों पर विशेष जोर रहेगा।
छात्रों को एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एक से दो सेमेस्टर विदेश में पढ़ने का भी अवसर मिलेगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी, ग्लोबल रिसर्च सुविधाओं और मजबूत एलुमनाई नेटवर्क का लाभ भी मिलेगा। योग्य और आर्थिक रूप से जरूरतमंद छात्रों के लिए 10% से 100% तक स्कॉलरशिप की व्यवस्था की गई है। अगले पांच वर्षों के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपए का स्कॉलरशिप फंड निर्धारित किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेश में पढ़ाई पर जहां 80 लाख से 1.2 करोड़ रुपए तक खर्च होते हैं, वहीं भारत स्थित इन कैंपसों में वही डिग्री 30 से 40 प्रतिशत कम लागत में मिल सकेगी। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता की शिक्षा, बेहतर करियर अवसर और विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत का लाभ मिलेगा।





