डबरी में मछली के साथ सब्जी उत्पादन से दोहरा लाभ, महिलाएं भी बन रहीं आत्मनिर्भर
रायपुर। सरगुजा जिले में मत्स्य पालन ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और स्वरोजगार का माध्यम बन रहा है। जलाशयों, आजीविका डबरियों और अमृत सरोवरों में मछली पालन से किसान, मछुआरे और स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से इस गतिविधि को बढ़ावा मिल रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं के जरिए प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में पारंपरिक जलाशयों में सामूहिक मत्स्य पालन के साथ आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक को भी अपनाया जा रहा है।
घुनघुट्टा जलाशय से 381 मछुआरों को सहारा
सरगुजा का घुनघुट्टा जलाशय आदिवासी मछुआ सहकारी समिति, कलगसा के 381 सदस्यों की आजीविका का आधार बना है। समिति को जलाशय 10 साल के लिए पट्टे पर दिया गया है। यहां सदस्य सामूहिक रूप से मछली पालन कर रहे हैं।
समिति के अध्यक्ष राम बिलोच राम के मुताबिक, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली बीज के लिए 7.62 लाख रुपए की अनुदान सहायता मिलती है। इससे जलाशय में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और मछुआरा परिवारों की आजीविका मजबूत करने में मदद मिल रही है।
डबरी से 25 हजार रुपए तक की कमाई
लखनपुर विकासखंड के किसान शिवबालक ने अपनी आजीविका डबरी में कतला, रोहू, मृगल और ग्रास कार्प मछलियों का पालन किया। उन्होंने करीब दो क्विंटल मछली बेचकर 20 से 25 हजार रुपए की आमदनी हासिल की। वे डबरी के पानी का उपयोग सब्जी उत्पादन और फसलों की सिंचाई के लिए भी करते हैं। इससे एक ही जल संसाधन से कई तरह के फायदे मिल रहे हैं।
महिलाओं के लिए भी खुल रहे अवसर
जिले में अमृत सरोवरों के जरिए स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी मछली पालन से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। वहीं, आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक से कम जगह में मत्स्य पालन की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
मत्स्य पालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण परिवार खेती के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित कर रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
