डिजिटल इंडिया कार्यशाला संपन्न: छत्तीसगढ़ में डेटा सुरक्षा पर फोकस

DPDP कानून के तहत ‘प्राइवेसी बाय डिजाइन’ मॉडल अपनाएगी सरकार, 90 दिन का एक्शन प्लान बनेगा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) और भारत सरकार के नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय डिजिटल इंडिया परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विभिन्न विभागों को दिशा-निर्देश दिए गए।

कार्यशाला में CHiPS के CEO मयंक अग्रवाल ने कहा कि नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षित डिजिटल सेवाएं राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि DPDP अधिनियम केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि ‘प्राइवेसी बाय डिजाइन’ और नागरिक-केंद्रित डेटा गवर्नेंस की दिशा में बड़ा बदलाव है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का ‘सेवा सेतु’ प्लेटफॉर्म पहले ही डिजिलॉकर, उमंग और माय स्कीम जैसे राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ चुका है। आने वाले समय में सभी विभागों को “डिजिटल-बाय-डिफॉल्ट” मॉडल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

NeGD के संचालक श्री सुनील जैन ने कहा कि अधिनियम के पालन से सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, साथ ही साइबर सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। वहीं NIC रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक पी. रामाराव ने विभागों को डेटा न्यूनतमकरण, लॉग मॉनिटरिंग और नियमित सिक्योरिटी ऑडिट अपनाने की सलाह दी।

कार्यशाला में डिजिलॉकर इंटीग्रेशन, डिजिटल डॉक्यूमेंट शेयरिंग, सहमति प्रबंधन और नागरिक शिकायत निवारण जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। CHiPS के संयुक्त CEO अनुपम आशीष टोप्पो ने बताया कि कार्यशाला के सुझावों के आधार पर 30, 60 और 90 दिनों की चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों के 180 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

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