दिल्ली होटल अग्निकांड: पुलिस जांच पर उठे सवाल, रसोइए को ‘बलि का बकरा’ बनाने के आरोप

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘फ्लोरिस स्टे’ होटल में 3 जून को हुए भीषण अग्निकांड की जांच को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस हादसे में अग्रवाल परिवार के आठ सदस्यों सहित विभिन्न देशों के 15 विदेशी नागरिकों समेत कुल 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं। अब इस मामले में दिल्ली पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

पुलिस ने होटल के 65 वर्षीय रसोइए केशव सिंह नेगी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या समेत पांच गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि आग लगने के दौरान उसने बिजली का स्विच और दरवाजा बंद कर दिया था, जिससे लोगों की जान खतरे में पड़ गई। हालांकि इस कार्रवाई का कई सामाजिक संगठनों, सिविल सोसायटी और स्थानीय लोगों ने विरोध किया है।

आलोचकों का कहना है कि होटल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी के लिए होटल प्रबंधन, मालिकों और संबंधित विभागों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, न कि एक कर्मचारी को। पूर्व नगर निगम पदाधिकारी रेणुका गुप्ता ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि होटल का लाइसेंस समाप्त होने के बाद भी वह दो महीने तक संचालित होता रहा और अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं की गई।

वहीं, कुछ विशेषज्ञों और सिविल डिफेंस से जुड़े लोगों का तर्क है कि आग लगने की स्थिति में बिजली आपूर्ति बंद करना सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा होता है। स्थानीय एसडीएम जितेंद्र कुमार ने भी कथित रूप से माना है कि समय पर बिजली बंद होने से बड़ा हादसा टल सकता था।

मामले में होटल प्रबंधन, संबंधित विभागों और पुलिस की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है। कई संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि हादसे के लिए जिम्मेदार सभी पक्षों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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