मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान: जंगलों के बीच पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं, लोगों में बढ़ा भरोसा

बस्तर। बस्तर संभाग के घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और दूरस्थ गांवों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत दस्तक सुनाई दे रही है। जहां पहले इलाज के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी और अनिश्चितता बनी रहती थी, वहीं अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें सीधे गांव-गांव पहुंचकर सेवाएं दे रही हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के दस दिन पूरे होते-होते यह पहल न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने में सफल रही है, बल्कि लोगों के मन में भरोसे की नई उम्मीद भी जगा रही है।

अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही निःशुल्क दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है, जिससे दूरस्थ इलाकों में तत्काल राहत मिली है। गंभीर मरीजों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर रेफर किया जा रहा है। अब तक 8055 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजकर विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया गया है।

जांच के दौरान मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामलों की पहचान की गई है। समय पर पहचान और इलाज शुरू होने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है।

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज तक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से सुदूर क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंच रही हैं। साथ ही लोगों के डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल (आभा) तैयार किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में इलाज और आसान हो सके। यह अभियान बस्तर के दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की नई तस्वीर पेश कर रहा है।

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