छत्तीसगढ़ का स्मार्ट पंजीयन मॉडल बना सुशासन की नई पहचान, 15 मिनट में हो रही रजिस्ट्री

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों को नई गति देते हुए राज्य सरकार ने पंजीयन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के नेतृत्व में लागू किया गया स्मार्ट पंजीयन मॉडल अब सुशासन और डिजिटल प्रशासन की नई पहचान बनता जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना है।

पहले जहां जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री कराने में लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था और कई बार एक से दो दिन तक का समय लग जाता था, वहीं अब आधुनिक डिजिटल व्यवस्था के जरिए यही प्रक्रिया मात्र 15 से 20 मिनट में पूरी हो रही है। इससे आम नागरिकों के समय और खर्च दोनों में बड़ी बचत हो रही है।

राज्य सरकार ने अगले एक वर्ष में प्रदेश के सभी 119 पंजीयन कार्यालयों को स्मार्ट सुविधाओं से लैस करने का लक्ष्य रखा है। पहले चरण में रायपुर, रायगढ़, दुर्ग, बिलासपुर, कुनकुरी, अभनपुर और तिल्दा सहित 10 प्रमुख कार्यालयों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

इन कार्यालयों में वातानुकूलित वेटिंग लाउंज, निःशुल्क वाई-फाई, मोबाइल चार्जिंग स्टेशन, शुद्ध पेयजल, आधुनिक शौचालय, हेल्प डेस्क और प्री-प्रेजेंटेशन काउंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

डिजिटल तकनीक के उपयोग से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ी है। टोकन सिस्टम लागू होने से भीड़ और अव्यवस्था कम हुई है, जबकि बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है।

अब नागरिकों को व्हाट्सएप नोटिफिकेशन, कैशलेस भुगतान, ऑनलाइन संपत्ति जानकारी और डिजीलॉकर जैसी सुविधाओं का लाभ भी मिल रहा है।

रायगढ़ के लाभार्थी आशीष अग्रवाल ने नई व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि अब पंजीयन कार्यालयों का माहौल पूरी तरह बदल गया है और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।

सरकार का मानना है कि स्मार्ट पंजीयन मॉडल “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के विजन को साकार कर रहा है। यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ में सुशासन को मजबूत कर रही है, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रही है।

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