छत्तीसगढ़

Chhattisgarh: नक्सलियों की चिट्ठी से सत्तापक्ष और विपक्ष के नेता आमने-सामने, राज्य के गृह मंत्री ने दिया दो टूक जवाब..पढ़िए पूरी खबर

रायपुर। (Chhattisgarh) छत्तीसगढ़ में एक बार फिर नक्सल समस्या ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। और इस बार माओवादी नेताओं ने चिट्ठी जारी कर सरकार के सामने शर्त भी रखी है। (Chhattisgarh) माओवादी नेताओं ने साफ कर दिया कि किस तरह से सरकार को निशर्त बातचीत के पहले, छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों से फोर्स और बल को हटाना होगा।(Chhattisgarh)  इसके साथ ही जेल में बंद माओवादी नेताओं को  रिहाई देनी होगी और इसके बाद ही नक्सलवाद से जुड़े बड़े नेता राज्य सरकार से चर्चा करने को तैयार होंगे ।

गृहमंत्री और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल आमने-सामने

इस पर एक बार फिर से छत्तीसगढ़ में मौजूदा कांग्रेस सरकार के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू और बीजेपी के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल आमने सामने हैं।  जहां विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर नक्सलियों के दबाव में आने की बात कही है, वहीं नक्सलियों के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखते हुए गृह मंत्री ने बढ़ेगी नपे तुले शब्दों में जवाब दिया है।

माओवादी नेताओं ने रखी शर्तें

छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से नक्सल नेताओं ने चिट्ठी जारी कर सरकार के पास बातचीत का प्रस्ताव दिया है लेकिन इसके लिए भी उन्होंने शर्त रखी है जो शर्तें माओवादी नेताओं ने रखी है उसे मानना मौजूदा कांग्रेस सरकार के लिए कठिन हो सकता है दरअसल माओवादी नेताओं ने अपने पत्र में लिखा है कि सरकार को सबसे पहले आदिवासी क्षेत्रों में मौजूद फोर्स और बल को हटाना होगा। इसके बाद माओवादी नेता जिन्हें जेल में रखा गया है। उन्हें बिना किसी शर्त के रिहा करना होगा। इसके बाद ही वह बातचीत के लिए तैयार होंगे इस पर छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने साफ कर दिया कि नक्सलियों की इस तरह की मांग को नहीं माना जा सकता बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रहेगा लेकिन वह राज्य सरकार के शर्तों पर होगा।

नक्सली नेता या माओवादी नेताओं की शर्तों पर नहीं होगी बातचीत

नक्सल समस्या पर छत्तीसगढ़ में कभी भी बात हो सकती है लेकिन यह नक्सली नेता या माओवादी नेताओं की शर्तों पर नहीं होगी । यह कहना है छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल का। इतना ही नहीं बृजमोहन अग्रवाल ने साफ शब्दों में राज्य सरकार पर दबाव में रहने की बात कही है आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि किस तरह से नक्सलवाद से निपटने के लिए मौजूदा कांग्रेस सरकार ने कुछ नहीं किया इसके उल्टे आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की बात करने वाली सरकार अब नक्सलियों के दबाव में भी नहीं है। पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने यह साफ कर दिया कि नक्सलियों के साथ बातचीत तभी हो सकती है जब मैं भारत के संविधान पर विश्वास करें हथियारों का समर्पण करें और अपनी गतिविधियों पर रोक लगाएं।

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