चित्रकोट में मछली पालन और बोटिंग से सालाना 10 लाख का मुनाफा, धनसिंह को मिलेगा राज्य स्तरीय सम्मान

42 सदस्यों से शुरू हुई सहकारी समिति में अब 62 लोग शामिल; ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार के लिए हुआ चयन
बस्तर। बस्तर के चित्रकोट में मछली पालन और नौका विहार को आजीविका का जरिया बनाकर ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति बदलने वाले धनसिंह बघेल को राज्य सरकार सम्मानित करेगी।
जगदलपुर के चित्रकोट स्थित प्राथमिक कुडुक मछुआ एवं नौका विहार सहकारी समिति मर्यादित के अध्यक्ष धनसिंह को प्रतिष्ठित ‘ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार’ देने की घोषणा की गई है। उनके नेतृत्व में समिति ने पारंपरिक मछली पालन को पर्यटन से जोड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।
42 सदस्यों से शुरू हुआ था सफर
इंद्रावती नदी के किनारे बसे इस वनांचल में ग्रामीण पहले मछली पकड़ने, वनोपज संग्रहण और सीमित खेती पर निर्भर थे। वर्ष 2009 में मत्स्य पालन विभाग के मार्गदर्शन में धनसिंह बघेल ने 42 सदस्यों को जोड़कर समिति की शुरुआत की।
वर्ष 2014 में चित्रकोट सिंचाई जलाशय और ग्राम पंचायत के रावन मुंडा को पट्टे पर लेकर मछली पालन शुरू किया। बाद में चित्रकोट जलप्रपात आने वाले पर्यटकों के लिए नौका विहार की सुविधा भी शुरू की।
मछली पालन से 9.5 लाख, बोटिंग से 8 लाख की कमाई
समिति में वर्तमान में 62 सदस्य हैं, जिनमें 41 पुरुष और 21 महिलाएं शामिल हैं। जलाशय से हर साल 1,980 किलो और नदी से 3,600 किलो मछली का उत्पादन होता है। इससे करीब 9.5 लाख रुपए की आय होती है।
वहीं, नौका विहार से सालाना लगभग 8 लाख रुपए की अतिरिक्त कमाई हो रही है। समिति का औसत वार्षिक शुद्ध लाभ करीब 10 लाख रुपए तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में 8 लाख 32 हजार 985 रुपए का शुद्ध लाभ दर्ज किया गया।
अपने संसाधनों से खड़ा किया कारोबार
समिति के पास 7 नावें, 250 लाइफ जैकेट और आधुनिक उपकरण हैं। अब समिति ने अपनी कमाई से मछली लैंडिंग सेंटर बनवाया है और परिवहन के लिए पिकअप वाहन भी खरीदा है।
इस मॉडल से जुड़े 62 परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। अब वे बेहतर शिक्षा और घरेलू सुविधाओं पर खर्च करने में सक्षम हैं। बस्तर में सहकारिता, स्थानीय संसाधनों और पर्यटन के मेल से रोजगार का यह मॉडल दूसरी समितियों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।





