सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप, हाईकोर्ट पहुंचा मामला; प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की मार्री बंगला तहसील के ग्राम जेवरतला में खसरा नंबर 908 की जमीन को लेकर विवाद ने सरकारी भूमि की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शासकीय दर्ज भूमि के कुछ हिस्से निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज किए गए और सरकारी कुएं को पाटकर उस पर कब्जा किया गया।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राजस्व विभाग के पास भूमि का रिकॉर्ड, नामांतरण और सीमांकन जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिए एक आम नागरिक को हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ा। शिकायतकर्ता ने मामले में न्यायालय की शरण ली है और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इसकी सूचना थाना, पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को दिए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, धमकी और जमीन संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामले में राजस्व रिकॉर्ड और नामांतरण दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। यदि सरकारी भूमि निजी नाम पर दर्ज हुई है तो इसकी प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करना प्रशासन के लिए जरूरी होगा। वहीं, यदि रिकॉर्ड में कोई वैध प्रक्रिया अपनाई गई है तो उसे भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

जिला प्रशासन का पक्ष जानने के लिए कलेक्टर से लेकर तहसीलदार तक संपर्क किया गया, लेकिन अधिकारियों ने मामले पर अपना पक्ष रखने से इनकार कर दिया। ऐसे में प्रशासन की चुप्पी ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। सरकारी जमीन जनता की संपत्ति है, इसलिए उसकी सुरक्षा और शिकायतों की पारदर्शी जांच प्रशासन की जिम्मेदारी है।

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