कंप्यूटर सेंटर से मशरूम तक, बबली ने खड़े किए कमाई के कई रास्ते; हर महीने 10 हजार तक आय

गौरेला। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर गांवों में नजर आने लगा है। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत चुकतीपानी की बबली यादव ने समूह से मिले सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर आय के कई साधन खड़े किए हैं। आज वे खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ गांव की दूसरी महिलाओं के लिए भी मिसाल बन रही हैं।

बबली यादव जागृति महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उन्होंने समूह के माध्यम से ऋण लेकर कंप्यूटर खरीदा और घर से ही फोटो कॉपी व कंप्यूटर संबंधी काम शुरू किया। गांव में सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। वहीं बबली को नियमित आमदनी का जरिया मिल गया।

मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी से बढ़ी कमाई

बबली ने आय बढ़ाने के लिए खेती से जुड़े दूसरे काम भी शुरू किए। उन्होंने मशरूम उत्पादन को आजीविका का साधन बनाया। इसके अलावा पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी का काम भी कर रही हैं। इस तरह उनके पास कमाई के एक से अधिक साधन तैयार हो गए हैं।

बबली के मुताबिक फोटो कॉपी-कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी से उनकी मासिक आय करीब 10 हजार रुपए तक पहुंच जाती है। इससे वे परिवार की जरूरतों को पहले की तुलना में बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं।

आवास और महतारी वंदन का भी मिला लाभ

बबली को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता नहीं दी, बल्कि आगे बढ़ने का भरोसा भी दिया है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी क्षमता पहचानने और नए काम शुरू करने का अवसर मिला।

बबली अपनी सफलता का श्रेय बिहान मिशन, स्व-सहायता समूह और शासन की योजनाओं को देती हैं। उनका कहना है कि यदि महिलाएं योजनाओं का लाभ लेकर मेहनत और लगन से काम करें तो वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ खुद भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

बबली की कहानी बताती है कि गांव में उपलब्ध संसाधनों, समूह के सहयोग और सरकारी योजनाओं को सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए तो महिलाओं के लिए रोजगार और आय के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।

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