रायपुर। गरीब परिवार के लिए अपना पक्का घर केवल चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद है। वर्षों तक कच्चे मकान में रहने वाले परिवार के लिए पक्के घर में प्रवेश करना जीवन में बड़े बदलाव जैसा होता है। बारिश में छत टपकने, सीलन और दूसरे जीव-जंतुओं के खतरे से राहत मिलने के साथ परिवार को बच्चों के सुरक्षित भविष्य का भरोसा भी मिलता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) इसी बदलाव का माध्यम बन रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की यात्रा को जनसेवा और जनकल्याण के संदर्भ में देखा जा रहा है। इसी भावना के तहत चल रहे सेवा संकल्प अभियान में जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने पर जोर दिया जा रहा है। आवास योजना के जरिए गरीब परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराना इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
सिर्फ मकान नहीं, आत्मविश्वास भी
छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में योजना से लाभान्वित परिवारों के लिए पक्का घर कई परेशानियों से मुक्ति का माध्यम बना है। किसी परिवार के लिए यह बरसात में टपकती छत से राहत है, तो किसी श्रमिक परिवार के लिए वर्षों से अधूरे सपने का पूरा होना। सुरक्षित आवास मिलने से परिवारों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे भविष्य की बेहतर योजना बना पाते हैं।
गरीबी केवल कम आय तक सीमित नहीं है। असुरक्षित आवास और बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी परिवारों की मुश्किलें बढ़ाता है। इसलिए आवास के साथ पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसी सुविधाओं तक पहुंच भी जरूरी है।
विकास में गरीबों की भागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के लिए भी शहरों का विकास केवल सड़क, भवन और दूसरी अधोसंरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है। वास्तविक विकास तभी संभव है, जब गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भी सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी सुविधाएं मिलें।
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आवास के माध्यम से परिवारों को स्थायित्व और सुरक्षा देना है। योजना की सफलता इस बात से भी आंकी जाती है कि पात्र परिवारों को समय पर घर मिले और वे उसमें सुरक्षित एवं सम्मानपूर्वक जीवन बिता सकें।
