रायपुर। ग्रामीण भारत में जब हौसलों को सही अवसर और संसाधनों का साथ मिलता है, तो बदलाव की एक नई इबारत लिखी जाती है।
जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) के ग्राम दुधाशी की निवासी संगीता सिंह की कहानी इसी जज्बे का जीवंत उदाहरण है। ‘बिहान’ योजना और स्वयं सहायता समूह से जुड़कर संगीता ने न केवल अपनी गरीबी को मात दी, बल्कि आज वे पूरे क्षेत्र के लिए डिजिटल क्रांति का चेहरा बन गई हैं।
BC सखी से आधार सेंटर तक का सफर
संगीता सिंह के सफर की शुरुआत वर्ष 2021 में एक ‘बीसी सखी’ (बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट) के रूप में हुई थी। उन्होंने बिहान योजना के तहत अपने समूह से 68 हजार रुपये का ऋण लेकर बैंकिंग सेवाओं की शुरुआत की।
पहले जिस गांव के लोगों को बैंक के छोटे-छोटे कार्यों के लिए शहर या ब्लॉक मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती थी, संगीता ने वह सुविधा उनके घर तक पहुँचा दी। उनकी ईमानदारी और कठिन परिश्रम ने जल्द ही ग्रामीणों का अटूट विश्वास जीत लिया।
प्रशासनिक सहयोग और नई जिम्मेदारी
संगीता के उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन ने उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। आदिवासी और दूरस्थ अंचलों में आधार सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिले में शुरू हो रहे पांच नए केंद्रों में से एक की कमान संगीता को दी गई है। जिला प्रशासन की ओर से उन्हें लैपटॉप और आधार किट प्रदान की गई है। अब वे अपने गांव में ही नया आधार पंजीयन और आधार अपडेट जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कर सकेंगी।
प्रेरणा का स्रोत बनी सफलता
संगीता सिंह की यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं।
उनकी कहानी सिद्ध करती है कि यदि महिलाओं को कौशल विकास और वित्तीय सहायता का मंच मिले, तो वे समाज की मुख्यधारा में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं के अंतर को भी पाट रही है।
