श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम: 800 करोड़ सीधे खातों में, शिक्षा से रोजगार तक फोकस

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार श्रमिकों और उनके परिवारों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है। बीते 2 वर्ष 4 माह में विभिन्न योजनाओं के जरिए करीब 800 करोड़ रुपए डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं। यह पहल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
श्रम विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा मंडल और श्रम कल्याण मंडल के जरिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। इस वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत श्रमिकों के 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा, जिससे उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी।
1 मई को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और बेहतर कार्य परिस्थितियों के संकल्प को दोहराया जाता है। भारत में इसकी शुरुआत 1923 में हुई थी और श्रमिक अधिकारों के क्षेत्र में डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान को विशेष रूप से याद किया जाता है।
प्रदेश के श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि सरकार की सोच है कि “मजदूर का बच्चा मजदूर न रहे”। इसके लिए मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति, मिनीमाता महतारी जतन, श्रमिक औजार किट, नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन और श्रमिक आवास सहायता जैसी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत प्रदेश में 38 भोजन केंद्रों में 5 रुपए में गर्म भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका विस्तार सभी जिलों में किया जाएगा। साथ ही श्रमिक आवास सहायता राशि को 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपए कर दिया गया है।
सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—हर हाथ को काम, उचित दाम और हर पेट को अन्न। इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद बढ़ी है।





