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बगिया के विष्णु का विकास विज़न,सुशासन से जन-जन तक पहुंचती सरकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बीते ढाई वर्षों में शासन की कार्यशैली में बदलाव की स्पष्ट झलक दिख रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने ‘सुशासन’ को नारे से आगे बढ़ाकर जमीनी क्रियान्वयन का आधार बनाने की कोशिश की है। सीमित समय में लिए गए फैसलों और योजनाओं की गति को सरकार अपने विकास विज़न की दिशा में अहम कदम मान रही है।

प्रदेश की पहचान ‘धान का कटोरा’ के रूप में रही है, और इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों के लिए प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी और 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर तय की गई। इसके साथ तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए पारिश्रमिक बढ़ाकर 5500 रुपए करना और चरण पादुका वितरण जैसे निर्णयों ने आदिवासी क्षेत्रों में राहत पहुंचाई है।

सरकार की प्राथमिकताओं में आवास भी प्रमुख रहा है। शपथ लेते ही करीब 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए, जिससे जरूरतमंद परिवारों को छत मिल सके। वहीं, 70 लाख से अधिक विवाहित महिलाओं को हर महीने 1000 रुपए की सहायता राशि देने की योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है और महिलाओं की भागीदारी को मजबूत किया है।

नक्सल प्रभावित बस्तर में शांति स्थापित करने के प्रयासों में केंद्र और राज्य का समन्वय भी दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति के साथ 2026 तक नक्सलमुक्ति का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और खेल आयोजनों जैसे बस्तर व सरगुजा ओलंपिक के जरिए प्रतिभाओं को मंच देने की पहल भी की गई है। ‘सुशासन तिहार’ जैसे आयोजन प्रशासन को सीधे जनता से जोड़ने का माध्यम बने हैं।

‘बगिया के विष्णु’ के रूप में पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री साय का लक्ष्य साफ है—अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना। फिलहाल, छत्तीसगढ़ में सुशासन की यह यात्रा गति पकड़ चुकी है और आने वाले समय में इसके व्यापक असर की उम्मीद जताई जा रही है।

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