लमना विलेज स्टे में ब्रिटिश मेहमान, जाना छत्तीसगढ़ का ग्रामीण जीवन

रायपुर। छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पर्यटन अब विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के लमना विलेज स्टे में ब्रिटेन से पहुंचे फ्रैंक रोजर मार्सटन और जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन ने गांव के जीवन, स्थानीय संस्कृति, खान-पान और ग्रामीण बाजार का अनुभव लिया। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने तिलक लगाकर और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
विदेशी मेहमानों का प्रवास केवल विलेज स्टे में ठहरने तक सीमित नहीं रहा। उन्हें गांव की गलियों, खेत-खलिहानों और ग्रामीण परिवेश से परिचित कराने के लिए विलेज वॉक कराया गया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से समझा। बच्चों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के साथ संवाद कर उन्होंने गांव की रोजमर्रा की गतिविधियों को भी जाना।
ग्रामीण हाट में देखे स्थानीय उत्पाद
लमना का ग्रामीण हाट विदेशी मेहमानों के लिए खास आकर्षण रहा। उन्होंने दुकानदारों और ग्रामीणों से बातचीत की तथा मिट्टी के बर्तन, बांस से बने सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, सब्जियां और स्थानीय खाद्य सामग्री देखी। हाट की चहल-पहल और स्थानीय लोगों के सहज व्यवहार ने उन्हें गांव के वास्तविक जीवन का अनुभव कराया।
पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने की पहल
लमना विलेज स्टे जैसे केंद्रों में पर्यटकों को सिर्फ घूमने के बजाय स्थानीय जीवन का हिस्सा बनने का अवसर मिलता है। ग्रामीण परिवारों के साथ समय बिताना, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और बाजारों से जुड़ना अनुभव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देता है। इससे होमस्टे संचालकों, स्थानीय गाइडों, हस्तशिल्पकारों और छोटे व्यवसायों के लिए आय के अवसर भी बन सकते हैं।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में जंगल, पर्वत, जलप्रपात और धार्मिक स्थलों के साथ ग्रामीण पर्यटन की भी संभावनाएं हैं। लमना में ब्रिटेन के पर्यटकों का प्रवास इसी मॉडल की झलक है, जहां प्रकृति, संस्कृति और ग्रामीण आतिथ्य एक साथ पर्यटकों को नया अनुभव देते हैं। छत्तीसगढ़ में पर्यटन अब पारंपरिक स्थलों से आगे बढ़कर स्थानीय जीवन और संस्कृति से सीधे जुड़ने वाले अनुभवों तक विस्तार पा रहा है।





