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बारिश में बढ़ा दूषित जल सप्लाई का खतरा: नालियों से नहीं हटीं पाइपलाइनें, हजारों लोगों की सेहत पर मंडरा रहा संकट

रायपुर। मानसून की शुरुआत के साथ ही राजधानी रायपुर में दूषित पेयजल आपूर्ति का खतरा बढ़ गया है। शहर के कई वार्डों में आज भी जलापूर्ति की पाइपलाइनें नालियों के ऊपर या उनके भीतर से गुजर रही हैं। ऐसे में बारिश के दौरान यदि पाइपलाइन में रिसाव होता है तो नालियों का गंदा पानी सीधे पेयजल में मिल सकता है और लोगों के घरों तक पहुंच सकता है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

जनवरी 2026 में जलबोर्ड के गठन के बाद इन पाइपलाइनों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन कई क्षेत्रों में यह काम अब तक अधूरा है। हाल ही में नगरीय प्रशासन विभाग ने भी सभी नगरीय निकायों को ऐसी पाइपलाइनों को प्राथमिकता के आधार पर हटाने और शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं।

पड़ताल में पुरानी बस्ती, रामनगर, कुशालपुर, ब्रह्मपुरी, महामाया मंदिर वार्ड, कचना की बीएसयूपी कॉलोनी और टिकरापारा के संजय नगर सहित कई इलाकों में जलापूर्ति लाइनें नालियों के संपर्क में पाई गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार पाइपलाइन में लीकेज होने से बदबूदार और गंदा पानी घरों तक पहुंच चुका है। बरसात में यह समस्या और गंभीर हो जाती है क्योंकि नालियों में गंदगी और दूषित पानी का स्तर बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रिसाव वाली पाइपलाइनें स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। हाइड्रोलॉजिस्ट डॉ. विपिन दुबे के अनुसार, दूषित पानी के कारण डायरिया, टाइफाइड और अन्य जलजनित रोग फैल सकते हैं। उन्होंने निगम को अकूस्टिक लीक डिटेक्टर और वीडियो एंडोस्कोपी जैसी आधुनिक तकनीकों से पाइपलाइन की जांच कराने की सलाह दी है।

नगर निगम के जलकार्य विभाग के अध्यक्ष संतोष साहू के अनुसार, नालियों के ऊपर से गुजरने वाली करीब 50 प्रतिशत पाइपलाइनों को शिफ्ट किया जा चुका है। शेष क्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से काम जारी है। हालांकि बारिश के मौसम में अधूरी शिफ्टिंग लोगों की चिंता बढ़ा रही है और सुरक्षित पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

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