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जल संरक्षण का महाअभियान: मनरेगा से गांवों में बढ़ रहा जल भंडार, हरियाली और आजीविका

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान बना जनआंदोलन, लाखों ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार

रायपुर। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते जल संकट के दौर में छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को लेकर एक बड़ा जनअभियान आकार ले रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, हरियाली, रोजगार और आजीविका संवर्धन का मजबूत माध्यम बनकर उभरा है। यह अभियान अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संचालित सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है।

अभियान के तहत प्रदेशभर में लगभग 1610 करोड़ रुपए की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य किए जा रहे हैं। इनमें तालाब, डबरी, चेकडैम, खेत तालाब, जल संवर्धन संरचनाएं और स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच जैसे कार्य शामिल हैं। इनका उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाना है।

इन परियोजनाओं से प्रतिदिन 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं हैं। इससे जल संरक्षण के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

राज्य सरकार ने जल संरक्षण को आजीविका से जोड़ने की दिशा में भी पहल की है। प्रदेश में 13 हजार से अधिक आजीविका डबरियों का निर्माण किया जा चुका है, जिससे मत्स्य पालन, बागवानी और सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ योजना के तहत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं, जिन्हें महिला स्व-सहायता समूहों की आय से जोड़ा जा रहा है।

अभियान में आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। जीआईएस आधारित योजना, जलदूत प्रणाली और क्यूआर कोड आधारित निगरानी व्यवस्था से पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है। जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, महिला समूहों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान गांवों में जल सुरक्षा, हरियाली और आत्मनिर्भरता की नई नींव रख रहा है।

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