अंतरिक्ष की ओर भारत की बड़ी छलांग,गगनयान का दूसरा एयर ड्रॉप टेस्ट सफल

दिल्ली। भारत ने मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए ISRO के गगनयान मिशन का दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस सफलता को देश की अंतरिक्ष तकनीक के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस परीक्षण के दौरान करीब 5.7 टन वजनी डमी क्रू कैप्सूल को भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से लगभग 3 किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया गया। कैप्सूल का पैराशूट सिस्टम तय समय पर खुला और उसने समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग की। यह टेस्ट अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
यह इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में किया गया। इससे पहले पहला टेस्ट 24 अगस्त 2025 को हुआ था। इस बार भी पैराशूट सिस्टम ने सही तरीके से काम किया, जिससे यह साबित हुआ कि रि-एंट्री के दौरान कैप्सूल की गति को नियंत्रित कर सुरक्षित लैंडिंग संभव है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस उपलब्धि पर इसरो को बधाई दी है। उन्होंने इसे गगनयान मिशन के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया।
गौरतलब है कि गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसके तहत 2027 तक भारतीय वायुसेना के पायलटों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है। मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री करीब 400 किलोमीटर की कक्षा में तीन दिन बिताएंगे और फिर हिंद महासागर में सुरक्षित लैंडिंग करेंगे।
इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल होने की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जो मानव को अंतरिक्ष में भेजने और सुरक्षित वापस लाने में सक्षम हैं।





