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छत्तीसगढ़ के जंगलों में खौफ: 3 साल में 562 वन्यजीवों की मौत, 9 बाघों ने भी गंवाई जान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जंगलों से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक विचलित करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। पिछले तीन वर्षों (दिसंबर 2023 से जनवरी 2026) के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 9 बाघों समेत कुल 562 वन्यजीवों की मौत हो गई है। इन मौतों का सबसे बड़ा और भयावह कारण अवैध शिकार और बिजली का करंट है, जो प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

हाथियों और बाघों पर मंडराता खतरा

रिपोर्ट के मुताबिक, इसी अवधि में बलरामपुर, सूरजपुर, धमतरी, रायगढ़ और कोरबा जैसे क्षेत्रों में 38 हाथियों की मौत दर्ज की गई। इनमें से 13 हाथियों की जान करंट की चपेट में आने से गई, जबकि 10 की मौत पानी में डूबने से हुई। बाघों की स्थिति भी चिंताजनक है; सारंगढ़, अचानकमार टाइगर रिजर्व और नवा रायपुर के जंगल सफारी सहित विभिन्न क्षेत्रों में 9 बाघ मारे गए। इनमें से 2 बाघों की मौत करंट से हुई, जबकि अन्य आपसी संघर्ष और बीमारी का शिकार हुए।

अवैध शिकार और करंट के बढ़ते मामले

वन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि वन्यजीवों के लिए इंसान सबसे बड़ा खतरा बन गया है:

  • अवैध शिकार: पिछले तीन सालों में शिकार के 102 मामले सामने आए हैं। अकेले वर्ष 2025 में शिकार की 58 घटनाएं दर्ज हुईं।
  • विद्युत करंट: फसलों की सुरक्षा के लिए बिछाए गए अवैध बिजली के तारों ने 30 वन्यप्राणियों की जान ली है।
  • हादसे: सड़क दुर्घटनाओं और अज्ञात वाहनों की टक्कर ने भी नीलगाय, चीतल और तेंदुए जैसे जीवों को अपना शिकार बनाया है।

विशेषज्ञों की चिंता: क्यों सुरक्षित नहीं हैं जंगल?

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में निगरानी की भारी कमी है। संगठित शिकारियों का नेटवर्क सक्रिय है और जंगलों के पास बढ़ती मानवीय बस्तियों व सड़कों के विस्तार से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास सिमट रहा है।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि अब केवल कागजी रणनीतियों से काम नहीं चलेगा; खुले बिजली तारों पर नियंत्रण, संवेदनशील इलाकों में आधुनिक निगरानी (जैसे ड्रोन) और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना अनिवार्य हो गया है।

वर्ष 2025 में सर्वाधिक 314 वन्यजीवों की मौत यह संकेत देती है कि यदि जल्द ही कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव-विविधता को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है।

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