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23 साल पुराना जग्गी हत्याकांड: अमित जोगी की जमानत और हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज, 1 अप्रैल 2026 को बिलासपुर हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई होने जा रही है। 23 साल पुराने इस मामले में न्याय की घड़ी करीब आते देख कानूनी सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्य आरोपी रहे अमित जोगी ने हाईकोर्ट की सुनवाई से ठीक पहले रायपुर लोअर कोर्ट से 50-50 हजार रुपये के बांड पर जमानत हासिल कर ली है।

क्या है पूरा मामला?
4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के तत्कालीन कोषाध्यक्ष और विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में कुल 31 अभियुक्त बनाए गए थे। सीबीआई जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था। हालांकि, 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

कानूनी पेच और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसने सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए केस को वापस छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की ‘मेरिट’ पर विस्तार से सुनवाई होनी चाहिए। जग्गी परिवार के वकील बीपी शर्मा का तर्क है कि यह हत्याकांड तत्कालीन सत्ता द्वारा “प्रायोजित” था और सबूत मिटाने की कोशिश की गई थी।

आज की सुनवाई क्यों है अहम?
आज हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में CBI, राज्य सरकार, सतीश जग्गी और अमित जोगी अपना-अपना अंतिम पक्ष रखेंगे। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या अमित जोगी को मिली दोषमुक्ति बरकरार रहेगी या उन्हें भी अन्य दोषियों की तरह सजा का सामना करना होगा। छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिला देने वाले इस हत्याकांड के फैसले पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह न केवल एक आपराधिक मामला है, बल्कि राज्य के रसूखदार राजनीतिक परिवार के भविष्य से भी जुड़ा है।

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