अभावों को मात देकर मनीषा जोंस सिद्दी ने जीता गोल्ड: कर्नाटक की बेटी ने कुश्ती में लहराया परचम

अम्बिकापुर/रायपुर। सरगुजा के गांधी स्टेडियम में आयोजित ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026’ की कुश्ती स्पर्धा का समापन ऐतिहासिक रहा। इस प्रतियोगिता के अंतिम दिन कर्नाटक की उभरती हुई पहलवान मनीषा जोंस सिद्दी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 76 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम किया। मनीषा की यह जीत केवल एक मेडल नहीं, बल्कि संघर्षों पर संकल्प की विजय है।
पिता के साये के बिना माँ बनीं संबल
मनीषा का जीवन चुनौतियों की एक लंबी दास्तां रहा है। जब वह महज पांचवीं कक्षा में थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। आर्थिक तंगी और सामाजिक बाधाओं के बावजूद उनकी माँ ने हार नहीं मानी। अपनी माँ की दिन-रात की मेहनत को याद करते हुए मनीषा भावुक हो उठीं। उन्होंने बताया कि पूर्व में कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में रजत और कांस्य पदक जीतने के बाद, उनके करियर का यह पहला गोल्ड मेडल है, जिसे वह अपनी माँ को समर्पित करती हैं।
स्पोर्ट्स हॉस्टल और परिवार की ताकत
अपनी सफलता का श्रेय मनीषा ने कर्नाटक के डिवाइस स्पोर्ट्स हॉस्टल के कोच और अपने परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि उनके बड़े भाई ने हमेशा मार्गदर्शक की भूमिका निभाई, जबकि उनका छोटा भाई (राज्य स्तरीय एथलीट) उनकी सबसे बड़ी हिम्मत बना। स्पोर्ट्स हॉस्टल के अनुशासित माहौल ने उनकी तकनीक को निखारने में मदद की।
ट्राइबल गेम्स: पहचान का नया मंच
मनीषा ने ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच जनजातीय बच्चों को अपनी विशेष पहचान के साथ आगे बढ़ने का अवसर देता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की मेजबानी, सुरक्षा और भोजन व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए यहाँ के लोगों के सहयोगात्मक व्यवहार को खिलाड़ियों के लिए सुखद बताया।
लक्ष्य: विश्व पटल पर तिरंगा लहराना
अम्बिकापुर की धरती पर मिली इस स्वर्णिम सफलता ने मनीषा के आत्मविश्वास को दोगुना कर दिया है। अब उनकी निगाहें अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर टिकी हैं। मनीषा का अंतिम लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसी प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर स्वर्ण पदक जीतना और देश का मान बढ़ाना है।





