गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक मंजूर, ऐतिहासिक सुधार या धार्मिक हस्तक्षेप

दिल्ली। उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को अपनी विधानसभा में मंजूरी दे दी है।
24 मार्च 2026 को करीब 7 घंटे चली लंबी बहस के बाद इसे ध्वनिमत से पारित किया गया। यह कानून विवाह, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों को धर्म से ऊपर उठकर एक समान कानूनी दायरे में लाता है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान और दंड
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस बिल को ‘समान न्याय की आकांक्षा’ बताया है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
अनिवार्य पंजीकरण: शादी का रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य होगा। शादी के 60 दिनों के भीतर पंजीकरण न कराने पर 10,000 रुपये का जुर्माना या 3 महीने की जेल हो सकती है।
लिव-इन रिलेशनशिप: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। सीएम के अनुसार, इसका उद्देश्य बेटियों को कानूनी सुरक्षा देना है।
सख्त सजा: धोखाधड़ी, दबाव या जबरदस्ती से की गई शादी के लिए 7 साल की जेल का प्रावधान है। साथ ही, बहुविवाह पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है और उल्लंघन पर 7 साल की कैद तय की गई है।
समान अधिकार: संपत्ति के उत्तराधिकार में बेटे और बेटियों को समान अधिकार दिए गए हैं।
राजनीतिक विरोध और आपत्तियां
जहाँ भाजपा इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे ‘असंवैधानिक’ करार दिया है।
मुस्लिम विधायक इमरान खेड़ावाला ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह शरीयत और कुरान के नियमों में सीधा हस्तक्षेप है। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने 2027 के चुनावों को देखते हुए जल्दबाजी में यह बिल पास किया है। विपक्ष ने इसे स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।



