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उदयनिधि बोले- हम भगवान में आस्था के खिलाफ नहीं, जातिगत भेदभाव खत्म होना चाहिए

दिल्ली। तमिलनाडु के पूर्व डिप्टी CM उदयनिधि स्टालिन ने सनातन खत्म वाले अपने बयान पर 2 दिन बाद सफाई दी। उदयनिधि ने कहा- मेरे बयान को गलत समझा जा रहा है।

मैं लोगों के मंदिर जाने के खिलापु नहीं बस वहां जाति के आधार पर जो भेदभाव होता है, उस सोच को खत्म करना होगा। वे किसी की धार्मिक आस्था या मंदिर जाने के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि समाज और मंदिरों में मौजूद जातिगत भेदभाव वाली सोच का विरोध कर रहे हैं।

उदयनिधि ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि जब उन्होंने कहा था कि “लोगों को बांटने वाले सनातन को खत्म होना चाहिए”, तो उसका मतलब धर्म या पूजा-पद्धति खत्म करना नहीं था। उनका उद्देश्य उस मानसिकता का विरोध करना है, जो लोगों को ऊंची और नीची जातियों में बांटती है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए।

उन्होंने अपने विचारों को द्रविड़ आंदोलन की विचारधारा से जोड़ते हुए जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा सामाजिक समानता और भेदभाव के खिलाफ खड़ी रही है।

उदयनिधि ने 12 मई को तमिलनाडु विधानसभा में कहा था कि सनातन धर्म समाज को बांटता है और इसे खत्म किया जाना चाहिए। इससे पहले 2023 में भी उन्होंने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से की थी, जिस पर देशभर में विवाद हुआ था।

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में उनकी टिप्पणी को हेट स्पीच जैसा बताया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने भी मार्च 2025 में उन्हें फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों को अपने बयानों के परिणाम समझने चाहिए।

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